सूरत की अलथाण थाना पुलिस ने शहर में चल रहे 11 करोड़ रुपये के बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में पुलिस ने कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े होने के बावजूद संगठित तरीके से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे. पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
गिरफ्तार आरोपियों में भाविक उर्फ प्रिंस प्रदीप श्रीवास्तव मुख्य आरोपी है, जो साइबर फ्रॉड के लिए क्यूआर कोड बनाने का काम करता था. इसके अलावा रवि दामजी गाबाणी (हीरा श्रमिक), तरुण कालुभाई राठौड़ (कपड़ा व्यापारी), सुरेंद्र उर्फ बालकिशन ओमप्रकाश गौड़ (अजमेर से गिरफ्तार) और गोविंद सोमनाथ सिद्ध (अजमेर से गिरफ्तार) शामिल हैं.
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ऐसे हुआ खुलासा
मामले की शुरुआत तब हुई जब अलथाण निवासी एक युवक ने अपना बैंक अकाउंट भाविक श्रीवास्तव को उपयोग के लिए दिया. कुछ समय बाद खाते में बड़े और संदिग्ध लेनदेन होने लगे, जिससे युवक को शक हुआ. उसने इसकी सूचना अलथाण पुलिस को दी. पुलिस ने भाविक को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो करोड़ों रुपये के काले खेल का खुलासा हुआ.
पूछताछ में सामने आया कि रवि गाबाणी और तरुण राठौड़ ने अलग-अलग बैंकों में करीब 10 फर्जी खाते खुलवाए थे. इन खातों की वेलकम किट, एटीएम, चेकबुक और पासबुक भाविक को सौंप दी जाती थी. भाविक इन्हें कूरियर के जरिए अजमेर निवासी बालकिशन को भेजता था.
डमी पार्सल से बिछाया जाल
पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए 'डमी पार्सल' तैयार कर अजमेर भेजा. पहले से वहां मौजूद टीम ने कूरियर डिलीवरी बॉय बनकर बालकिशन को फोन किया. जैसे ही वह अजमेर के जनाना अस्पताल के पास पार्सल लेने पहुंचा, पुलिस ने उसे दबोच लिया. उसके साथ मौजूद गोविंद सोमनाथ को भी गिरफ्तार कर लिया गया.
जांच में अब तक 35 बैंक खाते सामने आए हैं, जिनमें 11 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है. यह रकम गेमिंग फ्रॉड और अन्य साइबर धोखाधड़ी के जरिए ठगी गई थी. इन खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' के रूप में किया जा रहा था.
दुबई कनेक्शन और बरामदगी
डीसीपी नीधि ठाकुर ने बताया कि सीपी अनुपम सिंह गहलोत के निर्देश पर सूरत पुलिस साइबर अपराध रोकने के लिए सक्रिय है. जांच में खुलासा हुआ कि ये आरोपी पैसे को अलग-अलग म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर अंततः दुबई भेजते थे. गिरोह के तार दुबई से जुड़े होने की आशंका है.
आरोपियों के पास से 21 मोबाइल फोन, 33 सिम कार्ड, 88 एटीएम कार्ड, 39 बैंक पासबुक, 5 चेकबुक और 2 इंटरनेट राउटर बरामद हुए हैं. इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड नोटबुक में चिपकाकर रखे जाते थे, जबकि एटीएम कार्ड किताबों के बीच छिपाए जाते थे. पुलिस तकनीकी जांच के जरिए कोड नामों की असली पहचान और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है.
संजय सिंह राठौर