सूरत में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया है. शहर के लिंबायत इलाके में अवैध देसी शराब के कारोबार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इलाके में कथित तौर पर चल रहे देसी शराब के अड्डे पर सोशल मीडिया लाइव के साथ ‘जनता रेड’ की. इस पूरी कार्रवाई को Facebook लाइव के जरिए प्रसारित किया गया, जिसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे.
वीडियो में दावा किया गया कि सूरत नगर निगम के वार्ड नंबर-26 में खुलेआम देसी शराब की बिक्री हो रही थी. लिंबायत थाना क्षेत्र के दत्तात्रेय नगर में लंबे समय से अवैध शराब के अड्डे की शिकायतें मिल रही थीं. जब कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तो वहां एक मेज पर देसी शराब की पोटलियों से भरा बैग रखा मिला. लाइव वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य ने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी.
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस कथित अवैध धंधे में छोटे बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा था. वीडियो में दिखाया गया कि शराब की पोटलियां बेचने वाले कोई बड़े तस्कर नहीं बल्कि नाबालिग बच्चे थे. जब कार्यकर्ता ने पूछा कि यह अड्डा किसका है, तो बच्चे ने ‘विशालभाई’ का नाम लिया. इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या पुलिस से बचने के लिए बच्चों को ढाल बनाया जा रहा है.
फेसबुक लाइव के दौरान सरकार पर निशाना
जनता रेड के दौरान ‘आप’ नेता श्रवण जोशी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब गृह मंत्री कहते हैं कि कहीं भी शराब बिकती दिखे तो सूचना दें, तो यह देखिए कि उनकी नाक के नीचे ही शराब बेची जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में अच्छी सरकारी स्कूल या अस्पताल भले न मिलें, लेकिन शराब की पोटलियां गली-गली में मिल रही हैं.
जोशी ने इस मामले को सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी सरकार और गृह राज्य मंत्री की जिम्मेदारी बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसा ‘गुजरात मॉडल’ है, जहां रिहायशी इलाकों में खुलेआम शराब बिक रही है.
चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था बना बड़ा मुद्दा
आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह मामला राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है. विपक्ष इस घटना को लेकर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी में है. वहीं, रिहायशी क्षेत्रों में बच्चों से शराब बिकवाने की बात सामने आने से स्थानीय महिलाओं और नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. कई नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे अड्डे पुलिस की जानकारी या मिलीभगत से चल रहे हैं.
पुलिस कार्रवाई पर सबकी नजर
‘आप’ कार्यकर्ताओं ने मौके पर पुलिस को भी बुलाने की बात कही है. अब यह देखना बाकी है कि वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन इन अवैध शराब अड्डों पर किस तरह की कार्रवाई करता है.
स्थानीय चुनावों से पहले यह मुद्दा शहर की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है और कानून-व्यवस्था पर बहस को और तेज कर सकता है. सूरत और पूरे गुजरात में इस घटना ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है.
संजय सिंह राठौर