गुजरात में BJP को '60 सीटें' मिलने वाली रिपोर्ट पर संघ ने कहा- ये सर्वे हमारा नहीं

आरएसएस और बीजेपी ने राज्य में दलित आंदोलन के बाद यह सर्वेक्षण करवाया. सर्वे के लिए संघ प्रचारकों ने लोगों से फीडबैक लिया. सर्वे में यह भी सामने आया है कि ऊना की घटना के बाद दलितों ने बीजेपी से दूरी बना ली है.

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पीएम मोदी-अमित शाह पीएम मोदी-अमित शाह

प्रियंका झा

  • अहमदाबाद,
  • 03 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का गढ़ माने जाने वाले गुजरात में अब पार्टी अपनी पकड़ खोती जा रही है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि अगर इस वक्त गुजरात में चुनाव हुए तो पार्टी को विधानसभा की 182 में से 60-65 सीटों के साथ ही संतुष्ट होना पड़ेगा.

'अहमदाबाद मिरर' के मुताबिक, आरएसएस और बीजेपी ने राज्य में दलित आंदोलन के बाद यह सर्वेक्षण करवाया. सर्वे के लिए संघ प्रचारकों ने लोगों से फीडबैक लिया. सर्वे में यह भी सामने आया है कि ऊना की घटना के बाद दलितों ने बीजेपी से दूरी बना ली है.

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सर्वे के बाद आनंदीबेन ने दिया इस्तीफा
खबरों के मुताबिक ने यह सर्वे दिखाकर ही गुजरात की पहली को इस्तीफा देने के लिए तैयार किया, और उन्होंने सोमवार को पार्टी को अपना इस्तीफा सौंप दिया.

पाटीदार और दलित आंदोलन ने छवि को नुकसान पहुंचाया
'अहमदाबाद मिरर' के मुताबिक यह भी कहा जा रहा है कि पाटीदार आरक्षण और दलित आंदोलन की वजह से पार्टी की छवि को इतना नुकसान पहुंचा है कि 2017 के चुनावों में बीजेपी का 18 सीटों पर भारी अंतर से चुनाव हारना तय है. सर्वे यह भी कहता है कि राज्य के आदिवासी भी अब सरकारी नौकरियों और भूमि आवंटन की प्रक्रिया में हिस्सेदारी की मांग लेकर आंदोलन कर सकते हैं.

हालांकि आरएसएस ने ऐसे किसी भी सर्वे की बात से इनकार किया है और कहा है कि बीजेपी खुद ऐसे सर्वे करवा सकती है.

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RSS ने किया खंडन
दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 'आज तक' से बातचीत में कहा कि हमारी तरफ से ऐसी कोई भी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है. हम ऐसी किसी भी रिपोर्ट का खंडन करते हैं.

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