गुजरात के जामनगर में चल रही पुलिस भर्ती बोर्ड की प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. जामनगर पुलिस हेडक्वार्टर में आयोजित दौड़ परीक्षा में दो उम्मीदवारों ने मिलकर धोखा देने की कोशिश की, लेकिन सतर्क अधिकारियों की निगरानी में उनका फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया. इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ सीटी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कर ली गई है.
जानकारी के अनुसार, राज्यभर में इन दिनों पुलिस भर्ती बोर्ड की प्रैक्टिकल परीक्षा आयोजित की जा रही है. जामनगर केंद्र पर भी उम्मीदवारों की दौड़ परीक्षा चल रही थी. इसी दौरान एक उम्मीदवार ने दौड़ में पास होने के लिए गैरकानूनी तरीका अपनाया. आरोपी उम्मीदवार अर्जुन सिंह जाडेजा, जो गोंडल पंथक का निवासी है और वर्तमान में गोंडल एसआरपी ग्रुप-8 में हथियारबंद कांस्टेबल के पद पर कार्यरत है, दौड़ने में असमर्थ था. इसी वजह से उसने अपने साथ बैठे मित्र उम्मीदवार शिवभद्र सिंह के साथ मिलकर साजिश रची.
परीक्षा में धोखाधड़ी की साजिश
बताया जा रहा है कि दौड़ शुरू होने से पहले अर्जुन सिंह ने अपने पैरों में बंधी दोनों चिप की प्लास्टिक लॉक तोड़ दी और दोनों चिप शिवभद्र सिंह को सौंप दी. योजना यह थी कि शिवभद्र सिंह दौड़ पूरी करेगा और बाद में चिप वापस अर्जुन सिंह को दे देगा, जिससे रिकॉर्ड में अर्जुन सिंह का दौड़ पास दिखाया जा सके.
हालांकि, दौड़ विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी और निगरानी में तैनात पुलिसकर्मियों की नजर इस गतिविधि पर पड़ गई. दौड़ के दौरान संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर अधिकारियों ने तुरंत जांच की, जिसके बाद पूरा मामला उजागर हो गया.
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस संबंध में लीव रिजर्व पीआई जयपाल सिंह सोलंकी ने सीटी बी डिवीजन पुलिस थाने में दोनों उम्मीदवारों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है. डिप्टी एसपी जयवीर सिंह झाला ने भी मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की किसी भी धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पुलिस भर्ती जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सामने आए इस फर्जीवाड़े ने सिस्टम की निगरानी व्यवस्था की अहमियत को एक बार फिर साबित कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि आगे भी परीक्षा के दौरान कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो.
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