गुजरात: अब 'अशांत' नहीं 'निर्दिष्ट क्षेत्र' कहलाएंगे संवेदनशील इलाके, प्रॉपर्टी को लेकर नियम भी हुए सख्त

गुजरात विधानसभा ने 'अशांत क्षेत्र अधिनियम' में संशोधन कर अब इन्हें 'निर्दिष्ट क्षेत्र' घोषित किया है. नए कानून के तहत अब इन क्षेत्रों के लोग अपनी संपत्ति गिरवी रखकर बैंक लोन ले सकेंगे. साथ ही, कलेक्टर को अवैध संपत्ति हस्तांतरण पर स्वतः संज्ञान लेने और कब्जा करने की असीमित शक्तियां दी गई हैं, ताकि संपत्तियों का जबरन पलायन रोका जा सके.

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गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने अशांत क्षेत्र अधिनियम में संशोधन किया है (File Photo: PTI) गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने अशांत क्षेत्र अधिनियम में संशोधन किया है (File Photo: PTI)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:53 AM IST

गुजरात विधानसभा ने 'अशांत क्षेत्र अधिनियम' में एक बड़ा बदलाव करते हुए संशोधन विधेयक-2026 पारित कर दिया है. इस नए कानून के तहत अब 'अशांत क्षेत्रों' को 'निर्दिष्ट क्षेत्र' (Specified Areas) के रूप में पहचाना जाएगा. राजस्व राज्य मंत्री संजय सिंह महिडा द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य संपत्तियों के जबरन हस्तांतरण को रोकना और वैध मालिकों के हितों की रक्षा करना है.

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विधेयक पर चर्चा के दौरान विधानसभा में जोरदार बहस हुई. बीजेपी विधायकों ने कुछ इलाकों में हिंदू परिवारों के पलायन और मंदिरों पर दबाव का मुद्दा उठाया. वहीं, कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर राज्य में शांति है तो इतने नए क्षेत्रों को इस कानून में क्यों जोड़ा जा रहा है.

इस विधेयक के प्रमुख संशोधन और प्रावधान

'पीड़ित व्यक्ति' के दायरे का विस्तार: अब किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में रहने वाला कोई भी व्यक्ति अपने हितों की रक्षा के लिए कलेक्टर के समक्ष अभ्यावेदन कर सकेगा.

सार्वजनिक व्यवस्था की सुरक्षा: कानून के प्रावधानों के अनुसार, जिस क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की संभावना हो, उसे 'निर्दिष्ट क्षेत्र' घोषित किया जा सकता है.

कलेक्टर की शक्तियों में वृद्धि: संपत्ति की सुरक्षा के लिए, कलेक्टर स्वतः संज्ञान लेकर या किसी पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर जांच कर सकेंगे. यदि संपत्ति का हस्तांतरण आपत्तिजनक पाया जाता है, तो कलेक्टर उस संपत्ति पर कब्जा कर सकते हैं.

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वित्तीय सहायता सुविधा: लोगों की आर्थिक कठिनाई को कम करने के लिए एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके अनुसार एक निर्दिष्ट क्षेत्र का व्यक्ति वित्तीय संस्थानों में अपनी संपत्ति गिरवी रखकर ऋण या सहायता प्राप्त कर सकेगा.

जांच एवं सलाहकार समिति: निर्दिष्ट क्षेत्रों की घोषणा के संबंध में वास्तविक स्थिति का अध्ययन करने के लिए विशेष जांच दल और निगरानी एवं सलाहकार समिति की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाया गया है.

सदन में चर्चा के दौरान तीखी बहस

इस संशोधन की चर्चा के दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली. भाजपा के विधायक जमालपुर की स्थिति बताते हुए कहा, 'जमालपुर के 24 पोल में एक भी हिंदू परिवार नहीं बचा है, वहां के प्राचीन मंदिरों को स्थानांतरित करने की हालत हो गई है.' उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों पर फ्लैट बनाए गए हैं. लिंबायत से भाजपा विधायक संगीता पाटिल ने भी कहा, '500 की मुस्लिम आबादी के बीच एक हिंदू घर भी सुरक्षित नहीं है.' 

इस बीच, वेजलपुर के विधायक अमित ठाकर ने जुहापुरा में 2.81 लाख वर्ग मीटर जमीन पर बढ़ते दबाव के मुद्दे पर सरकार को घेर लिया और एएमसी द्वारा अशांत अधिनियम के तहत भूखंडों की नीलामी की कड़ी आलोचना की. कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने सरकार की नीति पर हमला करते हुए कहा, 'अगर राज्य में शांति है, तो अशांत अधिनियम में 744 नए क्षेत्रों को क्यों शामिल किया गया? 30 साल के शासन के बाद भी पलायन का मुद्दा क्यों है?' 

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उन्होंने आगे कहा कि संपत्तियों की बिक्री दोनों पक्षों की सहमति से हुई थी और भाजपा केवल वोटों के लिए शोर मचा रही है. 

सरकार ने दावा किया कि विशेष जांच दल और निगरानी एवं सलाहकार समिति की भूमिका को नामित क्षेत्रों की घोषणा से संबंधित वास्तविक स्थिति का अध्ययन करने के लिए और अधिक प्रभावी बनाया गया है. इस संशोधन के माध्यम से राज्य सरकार नामित क्षेत्रों में संपत्ति धारकों के अधिकारों की रक्षा करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

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