गुजरातः आर्टिस्ट जेरामभाई पटेल का निधन, सेवक को दिए एक करोड़

गुजरात के जाने माने आर्टिस्ट जेरामभाई पटेल का निधन हो गया है.  वह 86 साल के थे. लेकिन मरने से पहले उन्होंने अपने  सेवक डायाभाई मारवाड़ी के खाते में एक करोड़ और आठ लोगों को 50 हजार से दो लाख रुपए नाम कर दिए.

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सेवक को दिए एक करोड़ सेवक को दिए एक करोड़

सबा नाज़

  • वडोडरा,
  • 19 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST

गुजरात के जाने माने आर्टिस्ट जेरामभाई पटेल नहीं रहे. सोमवार को 86 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. लेकिन इससे पहले वे अपने सेवक डायाभाई मारवाड़ी के खाते में एक करोड़ और आठ लोगों को 50 हजार से दो लाख रुपए तक दे गए.

दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक जेरामभाई को लकवा मार गया था. किसी की मदद के बिना वो कोई काम नहीं कर पाते थे. डायाभाई साए की तरह उनके साथ रहते थे. वे पिछले 42 साल से जेरामभाई की देखभाल कर रहे थे. डायाभाई कहते हैं, '12 साल की उम्र से ही मैं साहब (जेरामभाई) की सेवा करता आ रहा हूं. उनसे मेरा परिचय वडोदरा की एमएस यूनिवर्सिटी में हुआ. तब मैं बतौर में जाता था. साहब ने कहा तो मैं उनके साथ ही रहने लगा. मैं खुशकिस्मत हूं कि उनकी मेहनत से मुझ जैसे लोगों की जिंदगी संवर गई.'

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जेरामभाई ने काफी सस्ते में बेची पेंटिंग्स
जेरामभाई ने कई मीडियम में काम किया था. 250 के करीब पेंटिंग्स, स्कल्पचर, आर्टवर्क को उन्होंने दिल्ली की किरण नादार म्यूजियम को 6 करोड़ रुपए में दे दिया. पिछले साल सितंबर में यह डील उन्होंने खुद की थी. अपने पास सिर्फ 5 पेंटिंग्स रखीं. गिफ्ट में मिले कई बड़े कलाकारों की पेंटिंग्स भी म्यूजियम को दे दी. जानकारों का कहना है कि अगर अपना आर्टवर्क बाजार में बेचते तो कम से कम 25 करोड़ रुपए जरूर मिलते. मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़े जेरामभाई की पेंटिंग्स की एक्जिबिशन देश-विदश में 100 से ज्यादा लग चुकी है.

इसलिए म्यूजियम को दी थी पेंटिंग्स
तीन बार ललित कला अकादमी समेत कई से नवाजे जा चुके हैं. उनकी ख्वाहिश थी कि उनकी कला ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे. इसलिए अपनी पेंटिंग्स कम कीमत पर म्यूजियम को दे दी. बताया जा रहा है कि अंतिम वक्त में उन्होंने कहा था कि 'अब मेरी उम्र हो गई है. मेरा इकलौता बेटा अमेरिका में है. उसे आर्ट के बारे में कुछ पता नहीं. मेरे बाद पेंटिंग्स की मेरी विरासत कौन संभालता. इसलिए म्यूजियम को देने का फैसला किया. ताकि वहां आकर अन्य लोग इसे देख सकें.'

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