गुजरात के बनासकांठा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दांता तहसील के पीपलावाली गांव में स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में 82 छोटे बच्चे पिछले छह महीनों से खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं. यहां न तो पक्के कमरे हैं, न बिजली की व्यवस्था और न ही पंखे लगे हैं.
दरअसल, यह स्कूल दांता और अंबाजी के बीच अरावली पर्वतमाला के बीच बसे पीपलावाली गांव में स्थित है. यहां कक्षा 5 तक के करीब 82 बच्चे पढ़ने आते हैं. वर्तमान में 5 से 10 वर्ष तक के बच्चे भारी गर्मी के बीच पतरे के शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं.
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पुराना भवन टूटने के बाद शुरू नहीं हुआ नया निर्माण
पीपलावाली प्राथमिक विद्यालय शाला नंबर-2 के आचार्य हितेंद्र सिंह ससोदिया के अनुसार स्कूल परिसर में बना पुराना भवन जर्जर हो गया था. भवन के खतरनाक स्थिति में होने के कारण करीब छह महीने पहले उसे तोड़ दिया गया था.
उन्होंने बताया कि भवन तोड़ने के बाद अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है. ऐसे में शिक्षक और छात्र खुले में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. अरावली क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और इसी गर्मी के बीच बच्चे पतरे के शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं.
बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव
स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं. जमीन पर बैठने के लिए शतरंजी जैसी कोई व्यवस्था भी नहीं है. शिक्षक और स्टाफ भी इसी अस्थायी व्यवस्था में बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं.
आचार्य हितेंद्र सिंह ससोदिया का कहना है कि नया भवन कुछ महीनों बाद बनने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल बच्चों और स्टाफ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि अगर कोई मंत्री या अधिकारी इस गर्मी में यहां बैठकर देखे तो उन्हें स्थिति का अंदाजा हो जाएगा.
अधिकारियों ने दिया समय बदलने का सुझाव
इस पूरे मामले पर दांता तहसील के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर बी.एन. गुर्जर ने कहा कि यदि स्कूल के आचार्य की ओर से लिखित आवेदन किया जाता है तो फिलहाल स्कूल का समय सुबह में किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि इससे बच्चों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है, जबकि स्कूल भवन निर्माण को लेकर आगे की प्रक्रिया अलग से देखी जाएगी.
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