'सनातन धर्म का अपमान करने वाली सरकार की सत्ता में नहीं होगी वापसी', गुजरात में बोले अमित शाह

गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय के कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई मजबूती मिली है. राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 हटाना और तीर्थस्थलों का पुनरुद्धार इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है.

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गांधीनगर में स्वामीनारायण मंदिर के एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (Photo: X/@AmitShah) गांधीनगर में स्वामीनारायण मंदिर के एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (Photo: X/@AmitShah)

aajtak.in

  • अहमदाबाद,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:02 PM IST

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि संतों के आशीर्वाद से यह तय है कि जो सरकार सनातन धर्म के मूल्यों को ठेस पहुंचाएगी, वह देश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाएगी. गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक सनातन परंपराओं के अनुयायी ऐसी सरकार की प्रतीक्षा करते रहे, जो सनातन धर्म को उसका उचित सम्मान दे और उसके सिद्धांतों के अनुरूप शासन करे.

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यह कार्यक्रम भगवान स्वामीनारायण द्वारा 1826 में रचित पवित्र आचार संहिता ‘शिक्षापत्री’ के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था. 212 संस्कृत श्लोकों वाली यह ग्रंथ रचना स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायियों के लिए नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन का मार्गदर्शन करती है. अमित शाह ने कहा कि गुजरात के सपूत नरेंद्र मोदी पिछले 11 वर्षों से देश का नेतृत्व कर रहे हैं. उनके नेतृत्व में 550 वर्ष पहले ध्वस्त किए गए भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हुआ, जो सदियों से देशवासियों की आस्था और आकांक्षा का प्रतीक रहा है.

उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में मोदी सरकार के फैसले और पहलें भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं. अनुच्छेद 370 की समाप्ति, तीन तलाक की समाप्ति और सभी धर्मों के लिए समान नागरिक संहिता की पहल इसका उदाहरण हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि योग, आयुर्वेद, गो-रक्षा और बद्रीनाथ, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ तथा अब सोमनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के पुनरुद्धार के लिए भी निरंतर प्रयास किए गए हैं. उन्होंने भगवान स्वामीनारायण के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ब्रिटिश काल में जब समाज कुरीतियों और व्यसनों से ग्रस्त था, तब उन्होंने समाज को संगठित और सुधारने का कार्य किया.

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अमित शाह ने कहा कि ‘शिक्षापत्री’ जीवन के लिए नैतिक संविधान की तरह है, जो आत्म-अनुशासन, सामाजिक आचरण, करुणा, अहिंसा और कर्तव्यबोध की शिक्षा देती है. उन्होंने कहा कि आज भी यह ग्रंथ प्रासंगिक है, क्योंकि यह आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन में पारदर्शिता की सीख देता है. उन्होंने बताया कि भगवान स्वामीनारायण ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया, पशु बलि का विरोध किया और जातिवाद व छुआछूत के खिलाफ अभियान चलाया. अमित शाह ने कहा कि स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना से ही सनातन मूल्यों की रक्षा और समाज के कल्याण का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'सभी का कल्याण ही शिक्षापत्री का सार है.'

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