गुजरात में अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. वंश नाम के 1.5 साल के बच्चे ने खेलते-खेलते ‘हल्क’ नाम का प्लास्टिक का खिलौना निगल लिया. जिसके बाद परिवार तुरंत बच्चे को लेकर अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल पहुंचा. जहां X-ray में खिलौना पेट में दिखा. नतीजा ये हुआ कि सर्जरी करके खिलौने को बाहर निकालना पड़ा.
18 जनवरी के दिन बच्चा घर में खेल रहा था लेकिन परिवार ने अचानक बच्चे के चेहरे पर परेशानी देखी और कुछ समय बाद बच्चे को उल्टी होने लगी. जिसके बाद बच्चे की माता भाविकाबेन को शक हुआ. बच्चा खेल रहा था तो उसने सभी खिलौने चेक किए तो पता चला कि एक खिलौना गायब था. बच्चे से पूछने पर उसने खिलौना निगलने की बात कही. फिर क्या था, परिवार वाले तुरंत बच्चे को लेकर सिविल हॉस्पिटल पहुंचे. जहां X-ray में पेट के अंदर पूरा खिलौना दिखा, जिसे देखकर डॉक्टर भी दंग रह गए.
अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने मुश्किल सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए कहा, "बच्चे के पेट में फंसा खिलौना कोई टुकड़ा नहीं था, बल्कि हाथ, पैर और सिर वाली एक पूरे साइज़ की चीज थी. खाने की नली और पेट के बीच एक नैचुरल वाल्व होता है, और सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े खिलौने को इस वाल्व से होकर निकलना था. जब हमने एंडोस्कोप जैसे नाज़ुक टूल से उसे पकड़ने की कोशिश की, तो पेट में हवा होने की वजह से खिलौना फिसलता रहा. अगर हमने उसे हाथ या पैर से पकड़कर खींचा होता, तो उसके वाल्व में फंसने और वाल्व को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचने की बहुत बड़ी संभावना थी. हमने सब्र रखा और 45 मिनट तक चले ऑपरेशन के दौरान खिलौने के सिर को पकड़कर सावधानी से वाल्व पार करके उसे बाहर निकालने में कामयाब रहे. अगर यह खिलौना आंत में चला जाता, तो आंत फटने का खतरा होता और उसका ऑपरेशन करना पड़ता.
जब यह मुश्किल सर्जरी की गई उस समय सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट में 'इंटरनेशनल ब्लैडर एक्सट्रॉफी वर्कशॉप' चल रहा था लेकिन इमरजेंसी देखकर सुपरिंटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने खुद डॉ. स्वेता और एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की टीम के साथ मिलकर ये सफल ऑपरेशन किया.
ऑपरेशन के बाद 1.5 साल का वंश अब पूरी तरह से स्वस्थ है. डॉक्टर राकेश जोशी ने छोटे बच्चों के माता - 'पिता से अपील करके कहा कि, बच्चों को कभी भी इतने छोटे खिलौनों से अकेले नहीं खेलने देना चाहिए और जब बच्चा खेल रहा हो तो उस पर लगातार ध्यान देना चाहिए.'
अतुल तिवारी