राजधानी दिल्ली में बीते दिनों हुई मानसून से पहली ही बारिश ने दिल्ली की प्रमुख सड़कों की कलई खोलकर रख दी. नगर निगम के अंतर्गत आने वाली छोटी सड़कें तो छोड़िए दिल्ली की प्रमुख इलाकों की बड़ी सड़कें जो PWD और एनडीएमसी के इलाके में आती वहां भी जबर्दस्त जलभराव देखने को मिला.
दिल्ली की सड़कों पर हर साल जलभराव होता है तो इसे लेकर आखिर किसकी जवाबदेही बनती है. दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के कार्यकारी मेयर कैलाश सांखला ने कहा कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही ही की थी उसके बाद जब एमसीडी की तरफ से सभी मेयर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिल कर आए थे तो बहुत निराशा हुई थी. उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री ठोस जवाब देंगे पर उन्होंने सब टाल दिया इससे पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है.
एमसीडी ने दिल्ली सरकार पर समस्या को काबू ना करने पाने का आरोप मढ़ा. इसके बाद दिल्ली सरकार का पक्ष जानने पर मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली की प्रमुख सड़कें पीडब्ल्यूडी के पास हैं और पीडब्ल्यूडी सभी सड़कों को . लेकिन एमसीडी की सड़को में जबर्दस्त जलभराव नजर आ रहा है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी पीडब्ल्यूडी को 90 स्थानों की सूची दी है जहां जलभराव होता है.
मानसून आते ही सड़कों पर जलभराव दिल्ली वालों के लिए परेशानी लाता है लेकिन प्रशासन इस समस्या को नजरअंदाज करने में जुटा है. इसे लेकर सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग और नगर निगम के बीच एक बार फिर से खींचातानी शुरू हो गई है. अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले मानसून में दिल्ली की सड़कों पर जबर्दस्त जलभराव हो सकता है.
अंकित यादव