दक्षिणी रेलवे के सेलम डिवीजन की एक महिला असिस्टेंट लोको पायलट ने एक चीफ लोको इंस्पेक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. महिला ने आरोप लगाया है कि इंस्पेक्टर ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. यह घटना पिछले साल 13 सितंबर को एक ओरिएंटेशन कोर्स की परीक्षा के दौरान हुई थी. महिला की शुरुआती शिकायत के आधार पर आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने आरोपी अधिकारी का केवल तबादला करने और उसे चेतावनी देने की सिफारिश की थी.
ICC ने महिला का बयान दर्ज करते हुए कहा कि चीफ लोको इंस्पेक्टर टी. सेल्वराज ने उसके सिर, कंधे, जांघ, कूल्हे और होंठ को छुआ. हालांकि, सेलम डिवीजनल रेलवे मैनेजर के सामने अपनी अपील में महिला ने कहा कि यह घटना मेरे साथ केवल छूने या शारीरिक संपर्क तक सीमित नहीं थी. बल्कि, यह गंभीर यौन उत्पीड़न और मेरी गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया हमला था.
अपनी शुरुआती शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि ओरिएंटेशन कोर्स की परीक्षा के दौरान उसे अकेला पाकर सेल्वराज ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया. इसी आधार पर सेलम के सीनियर डिवीजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ने ICC का गठन किया. पीड़ित महिला ने समिति को बताया कि परीक्षा पूरी होने के बाद जब वह घर लौटी तो सेल्वराज ने उसे फोन किया और अपने किए के लिए माफी मांगी. उसने कहा कि ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी और महिला से इस घटना को "भूल जाने" का अनुरोध किया.
आरोप सिद्ध होने पर भी नहीं हुई आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई
महिला द्वारा जमा की गई कॉल रिकॉर्डिंग के ज़रिए इन दावों की पुष्टि करते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सेल्वराज ने सभी आरोपों को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है. रिपोर्ट में कहा गया कि ICC का मानना है कि टी. सेल्वराज (CLI/ED) के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं. ICC ने सेल्वराज का तबादला सेलम डिवीजन के इरोड डिपो से करने और भविष्य में इसी तरह के दुराचार या शिकायतें सामने आने पर सख्त कार्रवाई की कड़ी चेतावनी जारी करने की सिफारिश की.
ICC द्वारा की गई तथ्य-खोज जांच की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए दक्षिणी रेलवे ने आरोपी कर्मचारी का तबादला कोयंबटूर कर दिया और भविष्य में इसी तरह के दुराचार की पुनरावृत्ति होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की. समिति ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, पारदर्शिता और निगरानी को बेहतर बनाने के लिए कार्यालय परिसर के भीतर उपयुक्त स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने की भी सिफारिश की. अपनी अपील में महिला ने समिति की सिफ़ारिशों पर गंभीर आपत्तियां उठाते हुए कहा कि अपराध साबित होने के बाद भी अपराधी को केवल चेतावनी देना, अपने आप में काफ़ी तकलीफ़देह है.
ICC पर इस मामले को हल्के में लेने का आरोप लगाते हुए महिला ने कहा कि उन्हें जिस उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, वह उनकी निजी गरिमा पर सीधा हमला था. महिला ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि क्रू कंट्रोलर ने उन्हें जांच रिपोर्ट की एक कॉपी खुले लिफ़ाफ़े में थमा दी, मानो वह कोई सार्वजनिक दस्तावेज़ हो और इस दौरान गोपनीयता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया.
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