इंटेलिजेंस इनपुट से एक्शन तक, जानें दाऊद के करीबी सलीम डोला को भारत लाने की Inside Story

भारतीय एजेंसियों ने दाऊद इब्राहिम के करीबी सलीम डोला को इस्तांबुल से भारत लाने में बड़ी सफलता हासिल की है. इंटरपोल रेड नोटिस के बाद तुर्की में उसे पकड़ा गया. डोला को दिल्ली लाकर पूछताछ की जा रही है. वह डी-कंपनी के फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स का अहम सदस्य रहा है.

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रियल टाइम इंटेलिजेंस से बड़ी सफलता से भारत आया सलीम डोला. (Photo- ITGD) रियल टाइम इंटेलिजेंस से बड़ी सफलता से भारत आया सलीम डोला. (Photo- ITGD)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली ,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए दाऊद इब्राहिम के करीबी और डी-कंपनी के अहम सदस्य सलीम डोला को तुर्की के इस्तांबुल से भारत वापस लाने में कामयाबी पाई है. इस कार्रवाई को एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. सलीम डोला को बुधवार देर रात एक विशेष उड़ान के जरिए भारत लाया गया. दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही उसे केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त टीम ने हिरासत में ले लिया. इसके बाद उसे एक अज्ञात स्थान पर ले जाकर पूछताछ शुरू की गई.

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सलीम डोला लंबे समय से भारतीय एजेंसियों की नजर में था. वह कई मामलों में वांछित था, जिनमें जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंक वित्तपोषण जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. उसका नाम 1993 मुंबई बम धमाकों से जुड़े आरोपियों की मदद करने के मामलों में भी सामने आया था.

इंटरपोल रेड नोटिस के बाद तुर्की में गिरफ्तारी

इंटरपोल द्वारा भारत के अनुरोध पर जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद इस महीने की शुरुआत में तुर्की की एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया था. बताया जा रहा है कि वह इस्तांबुल के बेयलिकदुज़ु इलाके में एक फर्जी नाम से रह रहा था. कई हफ्तों की निगरानी के बाद एक संयुक्त ऑपरेशन में उसे पकड़ा गया.

सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी भारतीय और तुर्की एजेंसियों के बीच रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग का परिणाम है. एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि डोला इस्तांबुल को ट्रांजिट हब की तरह इस्तेमाल कर रहा था और हवाला तथा सोने की तस्करी के जरिए डी-कंपनी के नेटवर्क को पश्चिम एशिया और यूरोप में सक्रिय बनाए हुए था.

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डी-कंपनी में फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स संभालता था डोला

सभी आवश्यक कूटनीतिक मंजूरियां मिलने के बाद उसे भारत लाया गया. राष्ट्रीय जांच एजेंसी की टीम की निगरानी में उसे दिल्ली लाया गया और उसके बाद उससे पूछताछ शुरू की गई. सलीम डोला को डी-कंपनी का अनुभवी सदस्य माना जाता है. उसने 1990 के दशक में इस नेटवर्क में अपनी जगह बनाई और धीरे-धीरे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने लगा.

जांच एजेंसियों के अनुसार, वह फाइनेंस और लॉजिस्टिक्स का काम देखता था और हवाला चैनलों के जरिए दुबई से मुंबई तक पैसों का लेन-देन कराता था. इसके अलावा वह कराची और इस्तांबुल के जरिए सोने की तस्करी के नेटवर्क को भी संचालित करता था. डोला का पाकिस्तान से भी संबंध बताया जाता है और वह कराची में दाऊद इब्राहिम और उसके भाई अनीस इब्राहिम के संपर्क में रहा है.

बताया जाता है कि वह 2003 में भारत से फरार हो गया था. इसके बाद 2019 में उसे आखिरी बार यूएई में देखा गया था. दुबई में डी-कंपनी के नेटवर्क पर कार्रवाई के बाद उसने तुर्की को अपना ठिकाना बना लिया था. फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग और मुंबई पुलिस की संयुक्त टीम उससे पूछताछ कर रही है.

हवाला और गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क से जुड़े थे तार

एजेंसियों का मुख्य फोकस डी-कंपनी के मौजूदा ढांचे को समझना है. बताया जा रहा है कि दाऊद इब्राहिम की सेहत को लेकर भी एजेंसियां जानकारी जुटाना चाहती हैं और यह जानना चाहती हैं कि वर्तमान में नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा है.

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इसके अलावा एजेंसियां डी-कंपनी, लश्कर-ए-तैयबा और हाल के हवाला ट्रांजैक्शनों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही हैं. साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तुर्की, यूएई और दक्षिण-पूर्व एशिया में कौन लोग उसे फर्जी पासपोर्ट और ठिकाने उपलब्ध करा रहे थे.

सूत्रों के अनुसार, सलीम डोला पूछताछ में सीमित सहयोग कर रहा है, लेकिन एजेंसियों के पास उसके डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है. इस्तांबुल से उसके फोन और लैपटॉप भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है.

एनआईए समेत कई एजेंसियां कर रही हैं गहन पूछताछ

पिछले कुछ समय में तुर्की डी-कंपनी के लिए एक नया केंद्र बनकर उभरा है. यूएई में बढ़ते दबाव के बाद कई सदस्य वहां से हटकर तुर्की चले गए हैं. इस्तांबुल में बेहतर हवाई कनेक्टिविटी, बड़ी दक्षिण एशियाई आबादी और अपेक्षाकृत आसान रेजिडेंसी नियमों के कारण यह जगह उनके लिए अनुकूल मानी जा रही है.

इससे पहले 2024 में मलेशिया से भी डी-कंपनी से जुड़े एक अन्य आरोपी को भारत लाया गया था. ऐसे में सलीम डोला की गिरफ्तारी और भारत वापसी को एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है.

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