'भाई का रिक्शा GPS से जुड़ा था, हम खोजते पहुंचे तो शरीर के हिस्से बिखरे थे', बहन ने बताई दर्दनाक कहानी

दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके में 12 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से आठ की पहचान हो चुकी है. मृतकों में रिक्शा चालक मोहम्मद जुम्मन और मेडिकल शॉप चलाने वाले अमर कटारिया भी शामिल हैं. दोनों परिवार गहरे सदमे में हैं. जुम्मन की विकलांग पत्नी और तीन छोटे बच्चों के भविष्य को लेकर परिवार चिंता में है.

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कई परिवारों में मातम. Photo PTI कई परिवारों में मातम. Photo PTI

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 9:12 PM IST

दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार शाम हुए धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस के अनुसार अब तक आठ मृतकों की पहचान हो चुकी है, जबकि बाकी शवों की डीएनए जांच की जा रही है. पहचान के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे.

मृतकों में कई आम लोग शामिल
पहचाने गए मृतकों में अमर कटारिया (35), मोहम्मद जुम्मन (35), अशोक कुमार (34), मोहसिन मलिक (35), दिनेश कुमार मिश्रा (35), लोकेश कुमार अग्रवाल (52), पंकज सैनी (23) और मोहम्मद नौमान (19) शामिल हैं.

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मोहम्मद जुम्मन का परिवार बेसहारा
ई-रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद जुम्मन अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे. उनकी बहन नजमा ने बताया, 'भाई का रिक्शा जीपीएस से जुड़ा था. आखिरी लोकेशन लाल किले के पास मिली. जब वहां पहुंचे तो पता चला कि उनका निधन हो चुका है. शरीर के हिस्से बुरी तरह बिखरे हुए थे, हमने उनके कपड़ों से पहचान की.'

विकलांग पत्नी और तीन छोटे बच्चे
जुम्मन की विकलांग पत्नी और तीन छोटे बच्चे अब पूरी तरह असहाय हैं. नजमा ने कहा, 'भाभी काम नहीं कर सकतीं. बच्चे बहुत छोटे हैं. सरकार को उनकी पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.'

अमर कटारिया के परिवार में मातम
दक्षिण दिल्ली के कालकाजी में रहने वाले अमर कटारिया की मौत की खबर से पूरा परिवार सदमे में है. अमर की दवा की दुकान थी. उनके पिता जगदीश कटारिया ने बताया, 'अमर ने ब्लास्ट से 10 मिनट पहले फोन किया था कि वह घर लौट रहे हैं. बाद में किसी महिला ने फोन उठाकर बताया कि उनका मोबाइल लाल किले के पास मिला है, जहां धमाका हुआ.'

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LNJP अस्पताल में मिला शव
परिवार तुरंत लाल किले पहुंचा और फिर LNJP अस्पताल में रातभर इंतजार करने के बाद मंगलवार सुबह शव की पहचान हुई. अमर की पत्नी और तीन साल के बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है.

सरकार से सहायता की उम्मीद
दोनों परिवारों ने सरकार से आर्थिक सहायता और बच्चों की देखभाल की अपील की है. उनका कहना है कि वे अपने घर के कमाने वाले सदस्य को खो चुके हैं, अब सरकार ही सहारा दे सकती है.

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