आम तौर पर संसद में जनहित के मुद्दे उठाने को लेकर चर्चा में रहने वाले राघव चड्ढा इस बार किसी और वजह से सुर्खियों में हैं. आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है. इसी बीच पार्टी के हरियाणा इकाई के पूर्व अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने एक वीडियो जारी कर गंभीर आरोप लगाए हैं.
नवीन जयहिंद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए वीडियो में दावा किया कि राघव चड्ढा को दिल्ली में कथित 'शीशमहल' कहे जाने वाले सरकारी आवास पर बुलाकर उनके साथ मारपीट की गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना में राघव को चोट भी आई थी, जिसके इलाज के लिए उन्हें विदेश जाना पड़ा. जयहिंद ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि राघव को इस पूरे घटनाक्रम के बारे में खुलकर सामने आना चाहिए. उनका आरोप है कि राघव को केजरीवाल के दिल्ली का सीएम रहते उनके सरकारी आवास में बुलाकर मुर्गा बनाकर पीटा गया था.
नवीन जयहिंद ने अपने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'राजदार राघव जी वो क्यो नहीं बताते जब आपको शीशमहल में बुलाके मुर्गा बनाके पीटा गया था तो आप की आंख में चोट लगी जो इंग्लैंड में जाके ठीक हुई. जब आसुओं का सैलाब आया था. आपसे हिम्मत वाली तो महिला सांसद निकली जिसने लोगों को कुछ पिटाई का तो बताया, हिम्मत दिखाओ राघव लोगों को बताओ.'
राघव चड्ढा से पुरानी बातें बताने की अपील
वीडियो में जयहिंद ने कहा कि राघव चड्ढा को उन पुरानी घटनाओं पर भी बात करनी चाहिए, जिन पर अब तक चुप्पी साधी गई है. उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय वहां मौजूद लोग कौन थे और पूरी घटना में क्या-क्या हुआ. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कई अहम पहलुओं पर अब तक पर्दा पड़ा हुआ है.
इस पूरे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी ने एक आधिकारिक पत्र के जरिए राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया कि अब डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी अशोक मित्तल संभालेंगे. पार्टी ने यह भी अनुरोध किया कि राघव चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए.
राघव चड्ढा ने क्या कहा?
पार्टी के इस फैसले के बाद मामला और गरमा गया. राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपनी नाराजगी जताई और कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना था कि वह जनता से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें चुप कराया गया.
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राघव चड्ढा हाल के समय में पार्टी और देश के अहम मुद्दों पर सक्रिय नहीं थे. पार्टी का यह भी कहना है कि वह सत्ताधारी पक्ष के खिलाफ खुलकर बोलने से बच रहे थे, जिसके चलते यह फैसला लिया गया.
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