शराब नीति मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जेल से सरकार चलाने की अनुमति देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है. पेशे से वकील श्रीकांत प्रसाद द्वारा दायर याचिका में केजरीवाल के लिए वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कैबिनेट मंत्रियों के साथ बातचीत करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की मांग की गई है. याचिका में मीडिया संस्थानों को केजरीवाल के इस्तीफे और राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रपति शासन लगाने के संबंध में 'दबाव बनाने और सनसनीखेज सुर्खियां प्रसारित करने' से रोकने की भी मांग की गई है.
याचिका में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को केजरीवाल के इस्तीफे के लिए विरोध प्रदर्शन या बयान देकर 'अनुचित दबाव' बनाने से रोकने और 10 अप्रैल को डीडीयू मार्ग पर विरोध प्रदर्शन के लिए 'अवैध सभा' इकट्ठा करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की गई है. इसमें आरोप लगाया गया है कि सचदेवा विरोध प्रदर्शन करके और राजनीतिक दुर्भावना के साथ यातायात और शांति व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं और केजरीवाल पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं.
याचिका में कहा गया है कि पिछले 7 वर्षों से दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार का शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में शानदार ट्रैक रिकॉर्ड है. इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी की वर्तमान स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 21, 14 और 19 के तहत 'दिल्ली के लोगों के मौलिक अधिकारों' का उल्लंघन है. याचिका में कहा गया है कि न तो भारतीय संविधान और न ही किसी कानून ने मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री सहित किसी भी मंत्री को जेल से सरकार चलाने से रोकने का प्रावधान है.
याचिकाकर्ता श्रीकांत प्रसाद ने कहा है कि वह दिल्ली के उन गरीबों और वंचित लोगों की ओर से अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं, जो दिल्ली सरकार की योजनाओं से लाभ तो उठा रहे हैं लेकिन अपने अधिकारों के बारे में नहीं जानते हैं. अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित दिल्ली शराब घोटाले से संबंधित मनी लॉन्डिंग मामले में 21 मार्च की रात गिरफ्तार किया था। उनकी न्यायिक हिरासत 23 अप्रैल को समाप्त हो रही है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए ईडी की कार्रवाई को वैध ठहराया था.
संजय शर्मा