संसदीय सचिव केस में सिर्फ 2 AAP विधायकों ने दिया EC को जवाब, बाकी MLA ने मांगा और समय

संसदीय सचिव नियुक्ति मामले में आम आदमी पार्टी के सिर्फ दो विधायक प्रवीण कुमार और कैलाश गहलोत ने चुनाव आयोग को जवाब दिया.

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पंकज जैन / सुरभि गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

संसदीय सचिव की नियुक्ति के मामले में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों की लेट लतीफी का सिलसिला जारी है. विधायकों के लिए सोमवार को चुनाव आयोग में अपना जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका था. लेकिन चेतावनी के बावजूद 21 विधायकों में से महज 2 विधायाकों ने ही चुनाव आयोग में औपचारिक जवाब दिया है, जबकि 19 विधायकों ने दो से चार हफ्तों का और वक्त मांगा है.

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सूत्रों के मुताबिक संसदीय सचिव नियुक्ति मामले में सिर्फ दो विधायक प्रवीण कुमार और कैलाश गहलोत ने चुनाव आयोग को जवाब दिया. विधायक प्रवीण कुमार और कैलाश गहलोत ने अपने जवाब में लिखा है कि उन्होंने संसदीय सचिव के तौर पर कोई सुविधा, ऑफिस, सैलरी, स्टाफ या गाड़ी दिल्ली सरकार से नहीं ली है. दोनों ही विधायकों ने चुनाव आयोग से ये अपील भी की है कि हाई कोर्ट ने संसदीय सचिव की नियुक्ति को भंग कर दिया है. ऐसे में इस मामले को यहीं बंद कर देना चाहिए.

'आज तक' ने पूरे मामले में नजफगढ़ से आम आदमी पार्टी के विधायक से बात की. गहलोत ने बताया, 'जवाब देने में मुश्किल आ रही है. दिल्ली सरकार से जो जवाब आया है, उसमें ढाई हजार से ज्यादा पन्नें हैं. इसलिए हमें वकीलों के साथ बैठकर तैयारी करने का वक्त चाहिए. फंड खर्च को लेकर दिल्ली सरकार के GAD विभाग से जो जवाब आया है, उससे कई विधायक सहमत नहीं हैं. GAD विभाग ने कहा कि रुपए खर्च किए गए, तो विधायक सरकार को खत लिखकर आपत्ति जताएंगे.'

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गहलोत ने चुनाव आयोग में देरी से जवाब देने की वजह बताते हुए कहा, 'वकील हाई कोर्ट की छुट्टी और दशहरे की छुट्टी की वजह से विधायकों के साथ बैठक नहीं कर पाए हैं. पेन ड्राइव से ढाई हजार पन्ने निकलने में वक्त लगा है और हमें चार हफ्तों की जरूरत है.'

चुनाव आयोग ने 21 अपना जवाब जमा करने के लिए 17 तारीख की डेडलाइन दी थी. इससे पहले चुनाव आयोग ने सभी 21 विधायकों को 7 अक्टूबर तक जवाब जमा करने को कहा था. जिस पर आम आदमी पार्टी के विधायकों ने चुनाव आयोग से अपील की थी कि उन्हें मामले में अपना पक्ष रखने के लिए कुछ और कागजात जमा करने के लिए वक्त दिया जाए. इसके बाद आयोग ने अवधि को 10 दिन बढ़ाकर 17 अक्टूबर कर दिया था.

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