दिल्ली में 180 करोड़ के साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन ‘Cy-Hawk’ के तहत 180 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. शेल कंपनियों और म्यूल अकाउंट्स के जरिए देशभर में ऑनलाइन ठगी की जा रही थी. पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर मोबाइल और लैपटॉप जब्त किए हैं. मामले में 176 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी पाई गईं.

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दिल्ली में दो ठग गिरफ्तार (Photo: Representational ) दिल्ली में दो ठग गिरफ्तार (Photo: Representational )

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:29 PM IST

दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए ऑनलाइन ठगी के जरिए करीब 180 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई नई दिल्ली जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन Cy-Hawk’ के तहत की गई, जिसका मकसग संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को तोड़ना है.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सिंडिकेट शेल कंपनियों और म्यूल बैंक खातों के जटिल नेटवर्क के जरिए देशभर के पीड़ितों से ठगी की रकम को इधर-उधर करता था. जांच में सामने आया कि गिरोह ने कम से कम 20 फर्जी निजी कंपनियां बनाई थीं, जिनके बैंक खातों में साइबर ठगी से हासिल रकम जमा की जाती थी और फिर लेयरिंग के जरिए उसे आगे ट्रांसफर कर दिया जाता था.

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शेल कंपनियों और म्यूल खातों से देशभर में फैलाया ठगी का जाल

मामले का खुलासा तब हुआ जब National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान नई दिल्ली जिले में कई साइबर क्राइम हॉटस्पॉट सामने आए. जांच में एक निजी बैंक खाते पर शक हुआ, जिसमें बार-बार ठगी से जुड़ी रकम जमा हो रही थी. यह खाता कनॉट प्लेस के बाराखंभा रोड स्थित एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक के नाम पर था.

पुलिस जांच में पता चला कि यह खाता राजेश खन्ना नामक व्यक्ति के नाम पर था, जिसे कंपनी का निदेशक बनाया गया था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने यह कंपनी और बैंक खाता अपने दो सहयोगियों सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा के निर्देश पर खोला था. दोनों आरोपी फंड ट्रांसफर और पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहे थे.

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ऑपरेशन ‘Cy-Hawk’ में दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार

आगे की जांच में सामने आया कि इन आरोपियों ने 20 अन्य शेल कंपनियों के जरिए साइबर फ्रॉड की रकम को घुमाया. पुलिस ने जब इन कंपनियों और उनके खातों की जांच की तो 176 साइबर ठगी की शिकायतें सामने आईं, जिनमें कुल लेनदेन करीब 180 करोड़ रुपये का था. पीड़ित कई राज्यों से थे, जिससे गिरोह के देशव्यापी नेटवर्क का खुलासा हुआ.

जांच के दौरान राजेश खन्ना की नोएडा के एक होटल में मौत हो गई. वहीं, सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा ने शुरू में जांच में सहयोग किया, लेकिन बाद में टालमटोल करने लगे. मोबाइल फोन से मिले संदिग्ध चैट्स से यह साफ हुआ कि शेल कंपनियों पर पूरा नियंत्रण इन्हीं का था.

 

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