सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ के समक्ष होने वाली सुनवाई की होगी लाइव स्ट्रीमिंग

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यू यू ललित की अगुवाई में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि अब से संविधान पीठ के मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग कराई जाएगी. इस लाइव स्ट्रीमिंग को सुप्रीम कोर्ट के पोर्टल के जरिए वेबकास्ट किया जाएगा. अदालत का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्रियान्वयन की दिशा में उठाया गया पहला कदम है.

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संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 21 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग करने का फैसला लिया गया है. चीफ जस्टिस यू यू ललित की अगुवाई में मंगलवार को सभी जजों की फुल कोर्ट मीटिंग में सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया है कि अब संविधान पीठ के मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग यानी सीधा प्रसारण किया जाएगा. अगले हफ्ते से पांच जजों की पीठ के समक्ष होने वाले मुकदमों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग होगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट पोर्टल के जरिए वेबकास्ट किया जाएगा. 

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इस दौरान जज इस बात पर एकमत थे कि संविधान पीठ के समक्ष महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी. यह सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के क्रियान्वयन की दिशा में उठाया गया पहला कदम है.

अदालत में मुकदमों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के मुद्दे पर मंगलवार को रेजोल्यूशन भी पारित किया गया. इसके साथ ही कई प्रशासनिक मामलों पर भी विचार किया गया. 

बता दें कि मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न पीठों के समक्ष 70,000 से ज्यादा मामले लंबित हैं. हालांकि, जस्टिस ललित के चीफ जस्टिस बनने के बाद से बीते पंद्रह दिनों में करीब 7,000 मुकदमे निपटाए गए हैं. 

चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित ने फुलकोर्ट मीटिंग में लिस्टिंग सिस्टम में सुधार को लेकर सभी साथी जजों के साथ विचार-विमर्श किया.  

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इसके अलावा अदालत परिसर में सुविधाओं के सुधार और विकास, वकीलों के चेंबर ब्लॉक की जरूरत, निर्माण और उन पर होने वाले खर्च का आकलन भी किया गया. साथ में धनराशि के आवंटन पर भी चर्चा हुई.  

सूत्रों के मुताबिक, फुलकोर्ट में अगले वर्ष होने वाली छुट्टियों और अवकाश पर भी चर्चा हुई ताकि कम से कम अवकाश में अधिक काम निपटाया जा सके.

मुकदमों की लिस्टिंग यानी सुनवाई के लिए पीठवार सूचीबद्ध करने पर जब जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय ओक की पीठ ने आदेश में लिस्टिंग सिस्टम का जिक्र किया तो इस पर आम चर्चा हुई. फिर सीजेआई जस्टिस ललित को ये साफ करना पड़ा कि सुप्रीम कोर्ट जजों के बीच इस मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है. अब इस पर फुल कोर्ट रेजोल्यूशन भी पास होने से चीजे स्पष्ट हो गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अदालत की सुनवाइयों की लाइव स्ट्रीमिंग को वक्त की जरूरत बताया था. 

2018 का स्वप्निल त्रिपाठी फैसला

सितंबर 2018 में स्वप्निल त्रिपाठी फैसले में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने राष्ट्रीय और संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाइयों की लाइव स्ट्रीमिंग कराने का रास्ता साफ किया था. इस दौरान अदालत ने कहा था कि महत्वपूर्ण मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग से अदालत के बाहर मामलों को लेकर पारदर्शिता आएगी. 

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