हाईकोर्ट की फटकार और MCD की दुर्दशा के लिए केजरीवाल जिम्मेदार: अजय माकन

अजय माकन ने कहा कि जब दिल्ली में हमारी सरकार थी और एमसीडी में बीजेपी का शासन था तब भी हम उनको पैसा देते थे ताकि कर्मचारियों को तनख्वाह के लिए दिक्कत ना हो. उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिल रही है तो दिल्ली सरकार जिम्मेदार है.

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अजय माकन (फाइल फोटो) अजय माकन (फाइल फोटो)

मणिदीप शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 6:58 PM IST

एमसीडी कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिलने के मुद्दे पर हाईकोर्ट की ओर से दिल्ली सरकार को मिली फटकार के बाद कांग्रेस के नेता अजय माकन ने कहा कि हमें खुशी है कि हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर संज्ञान लिया है और एमसीडी को फटकार लगाई.

ने कहा कि जब दिल्ली में हमारी सरकार थी और एमसीडी में बीजेपी का शासन था तब भी हम उनको पैसा देते थे ताकि कर्मचारियों को तनख्वाह के लिए दिक्कत ना हो. उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिल रही है तो दिल्ली सरकार जिम्मेदार है क्योंकि उनकी नाक के नीचे कर्मचारियों को नहीं मिल रही. इससे जुड़े टीचर, सफाई कर्मचारियों, डॉक्टर्स, नर्स को सैलरी न मिलना बड़ी दुख की बात है.

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माकन ने कहा कि सबसे निचले स्तर के लोगों को तनख्वाह ना मिले तो ये सवाल खड़ा करता है कि हम कैसे उम्मीद करें कि राष्ट्र की राजधानी अंतरराष्ट्रीय स्तर की शहर बनेगी? उन्होंने कहा कि केंद्र से जितने पैसे पहले मिलते थे उतने ही मिल रहे हैं, जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की थी है, सब चीजें LG और केंद्र सरकार पर डालते रहेंगे. आखिर कब केजरीवाल दिल्ली के साथ मजाक करना बंद करेंगे.

ने कहा कि दिल्ली सरकार का लगातार बजट बढ़ रहा है लेकिन एमसीडी को दिया जाने वाला पैसा कम हो रहा है. आखिर केजरीवाल बताएं कि एमसीडी को दिया जाने वाले बजट में लगातार कमी क्यों हो रही है. उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार दिल्ली सरकार और एमसीडी तीनों को कह रहे हैं कि जल्दी से जल्दी कर्मचारियों की तनख्वाह दे वरना कांग्रेस पार्टी सड़क पर उतरकर इन कर्मचारियों के लिए प्रदर्शन करेगी.

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दूसरी ओर, मजदूर यूनियन के नेता विजय बागड़ी ने कहा कि कोर्ट के आदेश से हम दिल से स्वागत करते हैं लेकिन पिछली बार भी दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि 1 से 7 तक तनख्वाह मिलेगी मगर एमसीडी ने हाईकोर्ट के उस आदेश को भी नहीं माना. हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना एमसीडी पहले भी करती रही है, हालांकि इस बार उन्हें उम्मीद है कि इस बार हाईकोर्ट के इस आदेश को एमसीडी मानेगी.

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