दिल्ली: 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' की फाइल क्लियर नहीं कर रहे हैं LG', गोपाल राय का आरोप

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली के एलजी सक्सेना के पास सीएम अरविंद केजरीवाल को बेमतलब पत्र लिखने समेत हर तरह की चीजों के लिए वक्त है लेकिन रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ कैंपेन की फाइल क्लियर करने का वक्त नहीं है.

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दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय

अमित भारद्वाज / पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय का दावा है कि एलजी वीके सक्सेना दिल्ली सरकार की "रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ" अभियान से जुड़े फाइल को क्लियर नहीं कर रहे हैं. ये अभियान कल यानी कि 28 अक्टूबर से शुरू होना तय था.


गोपाल राय ने कहा कि 21 तारीख को ये फ़ाइल एलजी को भेजी गई थी लेकिन एलजी विनय सक्सेना की ओर से अभी तक फ़ाइल को मंजूरी नही दी गयी है. उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत सारे कामों के लिए फुर्सत है, रोजाना चिट्ठी लिखते हैं, इसी शहर में रहते हैं. लेकिन उन्होंने अबतक इस फाइल को साइन नहीं किया है. अभी तक फ़ाइल न आने की वजह से ये मुहिम पोस्टपोन करनी पड़ रही है.

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'कॉल तक नहीं उठा रहे एलजी'

गोपाल राय ने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना के पास सीएम अरविंद केजरीवाल को बेमतलब पत्र लिखने समेत हर तरह की चीजों के लिए वक्त है लेकिन रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ कैंपेन की फाइल क्लियर करने का वक्त नहीं है. राय ने आरोप लगाया कि एलजी कार्यालय को बार-बार कॉल करने के बावजूद, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया ,जिस कारण से रेड लाइट ऑन, गाडी ऑफ अभियान रोक दिया गया है.

'LG के पास रोजाना चिट्ठी लिखने की फुर्सत है लेकिन...'

उन्होंने आगे कहा कि 21 अक्टूबर को ये फाइल एलजी को भेजी थी गई लेकिन एलजी ने अभी तक फाइल को मंजूरी नहीं दी है. 

'गांधीगीरी के माध्यम से चलता है अभियान'

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि साल 2020 में रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ मुहिम शुरू हुई थी. उन्होंने कहा कि लगभग 10 से 12 चौराहों से गुजरकर हम घर पहुंचते हैं. रेड लाइट पर हम गाड़ी बन्द नहीं करते हैं. हर व्यक्ति 25-30 मिनट फ्यूल बर्निंग करता है. अगर इंजन बन्द रखे तो प्रदूषण कम हो सकता है. रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ अभियान इसी के लिए काम करता है. Grap के तहत भी नियम है. 28 तारीख से ये मुहिम फिर से शुरू होने की तैयारी थी. अगर LG से मंजूरी मिलती तो कुल 100 चौराहों पर गांधीगीरी के माध्यम से ये मुहिम चलती.  

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