इंफर्टिलिटी ने बढ़ाई आईवीएफ सेंटर्स की कमाई

महानगरों में बढ़ती इंफर्टिलिटी की समस्या के कारण सबसे ज्यादा धंधा आईवीएफ सेंटर्स का चल निकला है. बच्चे की चाह में इन सेंटर्स में पहुंचने वाले केवल बडी उम्र के दंपति नहीं बल्कि 25 से 35 साल के युवा दंपति भी सबसे बडे क्लाइंट हैं.

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अनु जैन रोहतगी

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2013,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST

महानगरों में बढ़ती इंफर्टिलिटी की समस्या के कारण सबसे ज्यादा धंधा आईवीएफ सेंटर्स का चल निकला है. बच्चे की चाह में इन सेंटर्स में पहुंचने वाले केवल बडी उम्र के दंपति नहीं बल्कि 25 से 35 साल के युवा दंपति भी सबसे बडे क्लाइंट हैं.

युवाओं में बढ़ती इंफ्रिटलिटी ना केवल आईवीएफ सेटर्स का बिजनेस बढ़ा रही है बल्कि इसके कारण लड़के-लड़कियां एग डोनर और स्पर्म डोनर बनकर अच्छा खासा कमा भी रहे हैं. इससे उन महिलाओं को भी अच्छी खासी आमदनी हो रही है, जो सेरोगेट मदर यानी किराए की कोख की सेवाएं दे रही हैं लेकिन सबसे ज्यादा पैसे कमा रही हैं वो लड़कियां जो खूबसूरत और पढ़ी-लिखी हैं, उनको एग डोनेशन के लिए लाख रुपये तक ऑफर किया जा रहा है.

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आईवीएफ विशेषज्ञों के मुताबिक शादी-शुदा यंग लड़कियों में इंफर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसी कारण एग डोनर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है.

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