देशभर में आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जिसमें फर्जी कॉलर खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों के साथ ठगी की वारदात को अंजाम देते रहते हैं. ऐसे ही फर्जी पुलिसवालों के फोन पर धमकी देने के कई केस भी सामने आ चुके हैं. दिन-ब-दिन बढ़ती इन घटनाओं को देखते हुए अब दिल्ली पुलिस ने इन पर लगान लगाने की तैयारी कर ली है.
दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगी के ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए आईडी कॉलिंग ऐप ट्रू कॉलर के साथ समझौता (करार) किया है. इसके तहत दिल्ली पुलिस डायरेक्ट्री सर्विसेज के किसी नंबर से कॉल आने पर रिसीवर के फोन पर नीला टिक मार्क और हरा बैज दिखेगा. इस पर सरकारी सेवा टैग हाइलाइट होगा.
कोरोनाकाल के बाद साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं. इसके बाद ही दिल्ली पुलिस ने यह बड़ा कदम उठाया है. दिल्ली के स्पेशल सीपी संजय सिंह ने बताया कि अब लोग ज्यादा से ज्यादा डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए साइबर जागरुकता बेहद जरूरी है.
आसान होगी फर्जी नंबरों की पहचान
दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता डीसीपी सुमन नलवा ने बताया कि जिन नंबरों के जरिए ठगी और फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा है, उन्हें दिल्ली पुलिस ट्रूकॉलर के साथ साझा करेगी. इससे आम लोग धोखाधड़ी करने वाले नंबरों की आसानी से पहचान कर सकेंगे.
दिल्ली पुलिस ने किया समझौता
ट्रू कॉलर और दिल्ली पुलिस के बीच हुए इस समझौते पर दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता डीसीपी सुमन नलवा और ट्रूकॉलर इंडिया की प्रज्ञा मिश्रा ने हस्ताक्षर किए. करार के दौरान दिल्ली के स्पेशल सीपी संजय सिंह भी मौजूद रहे.
कैसे होती है साइबर ठगी?
साइबर ठगी के मामलों में वैसे तो OTP पूछकर चपत लगाने के मामले सबसे ज्यादा आते हैं, लेकिन आजकल ऐसे केस भी आने लगे हैं, जिसमें पुलिसकर्मी बनकर लोगों के साथ फर्जीवाड़ा किया जाता है. इस तरह ठगी करने वाले लोग अपना नंबर ट्रूकॉलर पर पुलिस के नाम से सेव करा लेते हैं. इसके अलावा वाट्स ऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पुलिस की ड्रेस में किसी की फोटो लगा देते हैं.
इसके बाद किसी को भी फोन करने पर सामने वाला ठगों को असली पुलिसकर्मी समझने लगता है. समझदार लोग ऐसे कॉल आने पर पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ लोग इन ठगों का शिकार भी हो जाते हैं.
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