10 हजार जवान, 3000 कैमरे और AI तकनीक से निगरानी... गणतंत्र दिवस पर किले में तब्दील दिल्ली

गणतंत्र दिवस समारोह के लिए दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में कड़े और बहुस्तरीय सुरक्षा इंतजाम किए हैं. निगरानी के लिए 3,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, फेसियल रिकग्निशन सिस्टम और एआई-सक्षम स्मार्ट ग्लास का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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गणतंत्र दिवस समारोह के लिए दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. (Photo: PTI) गणतंत्र दिवस समारोह के लिए दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:39 PM IST

गणतंत्र दिवस समारोह के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में मल्टी-लेयर सुरक्षा इंतजाम किए हैं. अधिकारियों के अनुसार, नई दिल्ली इलाके में करीब 10,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें एआई-बेस्ड स्मार्ट ग्लास और हजारों सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला ने कहा, 'गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों और दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं.'

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उन्होंने बताया कि सुरक्षा के तहत पिकेट्स, बैरिकेडिंग और सभी स्टैंडर्ड एसओपी लागू की गई हैं. सभी पुलिसकर्मियों को डिप्लॉयमेंट प्लानिंग, पॉइंट-वाइज ब्रीफिंग और किसी इमरजेंसी की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई है और रिहर्सल भी कराई जा चुकी है. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली क्षेत्र में, परेड मार्ग और आसपास के इलाकों में वीडियो एनालिटिक्स और फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) से लैस 3,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.

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इन कैमरों से आने वाले लाइव फीड की निगरानी के लिए 30 से अधिक कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहां करीब 150 पुलिसकर्मी 24 घंटे तैनात रहेंगे. तकनीकी स्तर पर एक बड़े कदम के तहत, फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों को एफआरएस और वीडियो एनालिटिक्स से जुड़े एआई स्मार्ट ग्लास भी दिए गए हैं. महला ने कहा कि ये भारत में बने उपकरण अपराधियों, संदिग्धों और घोषित अपराधियों के डेटाबेस से रियल-टाइम में जुड़े हैं, जिससे भीड़ में किसी की तुरंत पहचान संभव होगी.

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इसके अलावा, बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, कई स्तरों पर जांच और तलाशी की व्यवस्था की गई है. रणनीतिक स्थानों पर एफआरएस तकनीक से लैस मोबाइल सर्विलांस वाहन भी तैनात किए जाएंगे. नई दिल्ली, उत्तर और मध्य दिल्ली में हजारों रूफटॉप पॉइंट्स की पहचान कर इलाके की निगरानी बढ़ाई गई है. अत्यधिक भीड़ वाले इलाकों- जैसे बाजार, बस टर्मिनल और रेलवे स्टेशन में भी सतर्कता बढ़ाई गई है. किरायेदारों और घरेलू सहायकों के वेरिफिकेशन जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं.

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष होंगी चीफ गेस्ट

भारत 26 जनवरी, 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा, जिसमें सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन होगा. परेड में तीनों सेनाओं की मार्चिंग टुकड़ियां, मिसाइलें और स्वदेशी हथियार प्रणालियां शामिल होंगी. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे. इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़े सभी औपचारिक कार्यक्रमों की अगुवाई भारतीय वायुसेना कर रही है. वायुसेना की मार्चिंग टुकड़ी में 144 युवा एयर वॉरियर्स शामिल होंगे, जिन्हें उनके उत्कृष्ट सैन्य अनुशासन के लिए चुना गया है. इस टुकड़ी का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर जगदेश कुमार करेंगे, जबकि स्क्वाड्रन लीडर निकिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश सुपरन्यूमरेरी अधिकारी के रूप में शामिल होंगे.

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इस बार कर्तव्य पथ पर निकलेंगी 30 झांकियां 

इस वर्ष की परेड का एक और प्रमुख आकर्षण 'संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक' थीम पर आधारित पूर्व सैनिकों की झांकी होगी. झांकी के अग्र भाग में अमर जवान ज्योति और ऐतिहासिक युद्ध उपकरणों के थ्री-डी मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें टी-55 और विजयंत टैंक, मिग-21, मिराज और जगुआर विमान, आईएनएस मैसूर और आईएनएस राजपूत शामिल हैं. इसमें 1965, 1971 के युद्धों और 1999 के कारगिल ऑपरेशन विजय का भी चित्रण होगा. झांकी का पिछला भाग राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की भूमिका को दर्शाएगा, जिसमें बाढ़ राहत, चिकित्सा सेवाएं, शिक्षा और ‘मेक इन इंडिया’ पहल में उनके योगदान को दिखाया जाएगा. 

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 26 जनवरी, 2026 को कर्तव्य पथ पर कुल 30 झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी, जिनमें 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों/विभागों/सेवाओं की झांकियां शामिल होंगी. ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ थीम के तहत ये झांकियां ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करेंगी.

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