दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, क्या CAQM अपने असली मकसद में पूरी तरह फेल हो चुका?

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या पुरानी और गंभीर होती जा रही है. सर्दियों में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर GRAP लागू होता है, जिसमें निर्माण और वाहनों पर रोक लगाई जाती है, लेकिन इससे स्वच्छ हवा नहीं मिल सकी. सुप्रीम कोर्ट ने CAQM की कार्यप्रणाली पर कड़ी आलोचना की, इसे प्रदूषण के मूल कारणों को न समझने और स्थायी समाधान न देने का दोषी ठहराया.

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जहरीली धुंध में घिरी दिल्ली और सवालों के घेरे में प्रदूषण नियंत्रक संस्था CAQM (Photo: PTI) जहरीली धुंध में घिरी दिल्ली और सवालों के घेरे में प्रदूषण नियंत्रक संस्था CAQM (Photo: PTI)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:11 AM IST

दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन 2025 में इसकी स्थिति बहुत गंभीर हो गई. हर साल सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता खराब होती है और तब ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है. इसके अंतर्गत निर्माण गतिविधियां रोक दी जाती हैं, वाहनों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं और स्कूल भी बंद कर दिए जाते हैं. बावजूद इसके, आम जनता को स्वच्छ हवा मिलना दूर की बात है. 

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यहां सवाल उठता है कि क्या आयोग वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति (CAQM), जो अगस्त 2021 में केंद्र सरकार ने EPCA की जगह बनाई थी, वायु प्रदूषण नियंत्रित करने में सफल हो पा रही है? CAQM को नियम बनाने, आदेश देने, उल्लंघन पर कार्रवाई करने और राज्यों को बाध्य करने की व्यापक शक्तियां दी गई हैं. 

इसमें केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और पर्यावरण से जुड़े सदस्य शामिल हैं. फिर भी, इसका काम ज्यादातर GRAP लागू करने तक सीमित रह गया है.

जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने CAQM की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताई. अदालत ने कहा कि CAQM प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की पहचान करने और स्थायी समाधान देने में विफल रही है. यह रवैया गैर जिम्मेदाराना है, क्योंकि प्रदूषण के जड़ तक पहुंचना आवश्यक है.

कर्तव्य पथ पर एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा (Photo: PTI)

यह भी पढ़ें: 'दो हफ्ते में दिल्ली-NCR में प्रदूषण के कारण बताएं...', सुप्रीम कोर्ट ने CAQM को लगाई फटकार

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आरटीआई के अनुसार, CAQM को करोड़ों रुपये का बजट हर साल मिला और खर्च भी किया गया. फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए गए, निरीक्षण हुए, लेकिन जमीन पर प्रदूषण में कोई सार्थक कमी नहीं आई. विशेषज्ञ मानते हैं कि CAQM केवल प्रदूषण के लक्षणों को नियंत्रित कर रही है, जबकि जड़ पर काम नहीं हो रहा.

पर्यावरण कार्यकर्ता सुझाव देते हैं कि दिल्ली-एनसीआर के लिए स्थायी समाधान की जरूरत है. इसमें पूरे साल की ठोस योजना, स्रोत-आधारित नीतियां और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए. केवल ठंड के मौसम में GRAP लागू करके प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता. साफ हवा हर मौसम में हम सबका अधिकार है.

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