दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में ओमैक्स मॉल में एक मॉक ड्रिल की गई. मकसद एक ही था कि अगर कभी कोई आतंकी हमला हो और मॉल में मौजूद लोगों को बंधक बना लिया जाए, तो सुरक्षा टीमें उस वक्त क्या करेंगी. इसी की तैयारी को परखने के लिए यह पूरा अभ्यास किया गया.
सुबह के वक्त बंधक वाली परिस्थिति की ड्रिल हुई. पुलिस और सुरक्षा टीमों ने दिखाया कि आतंकियों से कैसे बात की जाए, फंसे हुए लोगों को कैसे बाहर निकाला जाए और खतरे को कैसे कम किया जाए.
शाम को पूरे मॉल की लाइटें बंद कर दी गईं, यानी पूरा ब्लैकआउट किया गया. यह इसलिए किया गया ताकि अगर असली हमले में बिजली चली जाए तो सुरक्षा टीमें घबराएं नहीं, बल्कि उन्हें पता हो कि अंधेरे में भी काम कैसे करना है. लोगों को यह भी समझाया गया कि ऐसे हालात में शांत रहना, किसी सुरक्षित जगह छिपना और मदद की आवाज सुनकर बाहर आना कितना जरूरी होता है.
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यह ड्रिल सिर्फ ओमैक्स मॉल तक सीमित नहीं थी. दिल्ली की 13 अलग-अलग जगहों पर यही अभ्यास किया गया, जिनमें बाजार, मॉल और भीड़भाड़ वाले पब्लिक इलाके शामिल थे. दिल्ली पुलिस और दूसरी एजेंसियां इसमें शामिल रहीं और आम लोगों को भी बताया गया कि इमरजेंसी में उन्हें क्या करना चाहिए.
ऐसी ड्रिल इसलिए जरूरी है क्योंकि दिल्ली में आतंकी खतरा हमेशा बना रहता है. खासकर लाल किले जैसे पुराने और भीड़ वाले इलाकों में किसी भी वक्त कुछ भी हो सकता है. ऐसे में सुरक्षा टीमों का तैयार रहना बहुत जरूरी है. इस तरह की ड्रिल से उनका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और आम लोगों का डर भी थोड़ा कम होता है.
दिल्ली पुलिस का कहना है कि आगे भी ऐसी ड्रिल होती रहेंगी. साथ ही हर आम नागरिक से भी यही कहा गया है कि वो अपने आसपास कुछ भी संदिग्ध दिखे तो फौरन पुलिस को बताएं.
अरविंद ओझा