3.55 मिलियन कार्बन क्रेडिट्स की बिक्री से दिल्ली मेट्रो ने कमाए 19.5 करोड़

डीएमआरसी ने साल 2012 से 2018 तक छह साल के दौरान 3.55 मिलियन कार्बन क्रेडिट्स की बिक्री से 19.5 करोड़ रुपये की अच्छी कमाई की है. डीएमआरसी ऐसे कई अन्य प्रोजेक्ट से भी ऊर्जा की बचत कर रही है.

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दिल्ली मेट्रो (फाइल फोटोः पीटीआई) दिल्ली मेट्रो (फाइल फोटोः पीटीआई)

वरुण सिन्हा

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 8:13 AM IST
  • प्रदूषण नियंत्रण में दिल्ली मेट्रो ने किया कमाल
  • कार्बन क्रेडिट बेचकर कमाए 19.5 करोड़ रुपये

पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सभी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है. इस बार दिल्ली मेट्रो ने ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन घटाकर और कार्बन क्रेडिट्स की बिक्री कर पर्यावरण सेवी होने का सबूत न सिर्फ भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दे दिया है. आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने साल 2012 से 2018 तक छह साल के दौरान 3.55 मिलियन कार्बन क्रेडिट्स की बिक्री से 19.5 करोड़ रुपये की अच्छी कमाई की है. डीएमआरसी ऐसे कई अन्य प्रोजेक्ट से भी ऊर्जा की बचत कर रही है.

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दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने साल 2012 से 2018 तक छह साल के दौरान 3.55 मिलियन कार्बन क्रेडिट्स की बिक्री से 19.5 करोड़ रुपये की अच्छी कमाई की है. डीएमआरसी अपने परिचालन कार्यों से भारत में जलवायु परिवर्तन के परिमाण निर्धारित करने में अग्रणी रहा है. इसके अनेक ऐसे डेडिकेटेड प्रोजेक्ट्स ऊर्जा की बचत में सहायक हैं.

साल 2007 में दिल्ली मेट्रो विश्व की पहली मेट्रो अथवा रेल परियोजना बनी जिसे क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म (CDM) के तहत संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से पंजीकृत किया गया जिससे दिल्ली मेट्रो अपने रीजेनरेटिव ब्रेकिंग प्रोजेक्ट के लिए कार्बन क्रेडिट्स क्लेम करने में सक्षम हो सका.

क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत एक प्रोजेक्ट-आधारित ग्रीन हाउस गैस (GHG) ऑफसेट मैकेनिज्म उच्च आय वाले देशों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को निम्न और मध्यम आय वाले देशों में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने वाले प्रोजेक्ट्स से कार्बन क्रेडिट्स क्रय करने की अनुमति देता है जो क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने के उनके प्रयासों का एक हिस्सा है.

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क्लीन डेवलपमेंट मेकेनिज्म प्रोजेक्ट्स एमिशन क्रेडिट्स उत्पन्न करते हैं जिन्हें सर्टिफाइड एमिशन रिडक्शन (CERs) कहा जाता है जिन्हें क्रय किया जाता है. इनसे व्यापार किया जाता है. एक सीईआर एक टन कार्बन डाईऑक्साइड (CO2(eq) के उत्सर्जन में कटौती करने के बराबर होता है. क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म मेजबान देशों में दीर्घकालिक विकास लाभ के लिए मददगार होता है. क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म प्रोजेक्ट्स का प्रबंध कार्य “जलवायु प्रणाली में खतरनाक मानवीय हस्तक्षेप” से निपटने के लिए स्थापित एक उद्यम यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन एंड क्लाइमेंट चेंज (UNFCCC) की ओर से किया जाता है. दिल्ली मेट्रो का पहला क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म रीजेनरेटिव ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित था. इस प्रोजेक्ट से साल 2012 तक उत्पन्न कार्बन क्रेडिट्स 9.55 करोड़ रुपये में बेचे गए थे. 

साल 2012 से 2018 की अवधि में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में दिल्ली मेट्रो ने 3.55 मिलियन कार्बन क्रेडिट्स की कटौती की उपलब्धि प्राप्त की. साल 2012-18 की अवधि के दौरान कार्बन क्रेडिट्स की बिक्री से डीएमआरसी को भारतीय मुद्रा में 19.5 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. सीडीएम और गोल्ड स्टैंडर्ड प्रोजेक्ट्स की शुरुआत से भारतीय मुद्रा में कुल 29.05 करोड़ रुपये का राजस्व डीएमआरसी को प्राप्त हो चुका है.

 

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