दिल्ली वालों की दीवाली इस साल भी सूखी-सूखी ही रहेगी. देश की राजधानी में तमाम प्रीमियम ब्रांड की कमी जो शराब के शौकीनों को खलती है, उसमें बेहतरी की संभावना कम ही है. दरअसल, पिछले साल से दिल्ली में प्राइवेट कंपनियों की जगह सिर्फ सरकारी उपक्रमों के जरिए ही चलाई जा रही दुकानें शराब बेच रही हैं. दिल्ली सरकार ने मौजूदा पॉलिसी ही अगले 6 महीने तक यानि वित्तीय साल 2023-24 के खत्म होने तक जारी रखने का फैसला लिया है.
क्या होगा पॉलिसी जारी रहने का असर
आने वाले दिनों में त्योहार का मौसम आने वाला है, जिसमें शराब की बिक्री आम दिनों की तुलना में ज्यादा होती है, लेकिन एक साल से अधिक समय से दिल्ली में रिटेल यानि खुदरा शराब बेचने के लिए सिर्फ सरकारी एजेंसियों के जरिए ही दुकानें चल रही हैं.
लोगों की शिकायत है कि दिल्ली में कई सारे प्रीमियम ब्रांड नहीं मिल रहे हैं जो कि शराब पॉलिसी में निजीकरण होने के बाद आसानी से मिल जाया करते थे, लेकिन जबसे दिल्ली की आबकारी नीति में घोटाले का खुलासा हुआ तबसे शराब के ब्रांड की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है. आगामी 6 महीने तक चलने वाली पॉलिसी के कारण लोगों को उनके मनपसंद ब्रांड मिलने की उम्मीद नहीं है.
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कौन-कौन से ब्रांड मिलने की संभावना नहीं
कई प्रीमियम ब्रांड जैसे कि Chivas Regal, Absolut Vodka, Royal Stag, Imperial Blue, Glenlivet, 100 Pipers जैसे ब्रांड फिलहाल दिल्ली के बाज़ारों में नहीं मिल पाएंगे.
आबकारी विभाग के सूत्रों की मानें तो इसकी बड़ी वजह ये है कि इन ब्रांडों से जुड़ी हुई फ्रेंच कंपनी नाम शराब घोटाले मामले में है. दिल्ली में खुदरा शराब सिर्फ सरकारी उपक्रमों के जरिए बेची जा रही है तो घोटाले से जुड़ी किसी भी कंपनी का सरकारी खरीदी से लेना-देना ठीक नहीं होगा.
दूसरी कंपनियों के लिए है सुनहरा मौका
मगर, आबकारी विभाग का यही भी मानना है कि यह मौका उन कंपनियों के लिए काफी सुनहरा है जो अपने ब्रांड दिल्ली में लॉन्च करना चाहती हैं. अगले 6 महीने में जब बड़े ब्रांड दिल्ली की दुकानों में उपलब्ध नहीं होंगे तो वह अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकते हैं.
क्या ब्रांड की उपलब्धता का असर दिल्ली सरकार की कमाई पर हुआ है?
पिछले 1 साल से अधिक से दिल्ली में प्रीमियम ब्रांड उपलब्ध नहीं है. ऐसे में लोगों का रुझान दिल्ली के आसपास के इलाकों में शराब की खरीदारी पर ज्यादा हुआ है. मसलन दिल्ली के नुकसान का सीधा फायदा गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों को मिल रहा है जो कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में आते हैं.
मगर, दिल्ली का आबकारी विभाग ऐसी बातों को अपने आंकड़ों से गलत ठहरा रहा है. विभाग के मुताबिक पिछले साल सितंबर से लेकर इस साल सितंबर तक आबकारी विभाग का राजस्व लगभग 7200 करोड़ का रहा है, जबकि पिछले वित्तीय साल यानी अप्रैल 2022 से लेकर इस साल मार्च 2023 तक कमाई 6850 करोड़ के आसपास रही थी. यानी सरकारी दावों की माने तो पिछले साल से इस साल शराब बेचकर होने वाली कमाई में बढ़ोतरी हुई है ना कि कमी आई है.
कुमार कुणाल