वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, सुरंगें और एलिवेटेड रोड... अब ढ़ाई घंटे में दिल्ली से देहरादून, बनकर तैयार हुआ नया एक्सप्रेसवे

दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे लगभग बनकर तैयार है. 210 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर 6–7 घंटे से घटकर करीब 2.5 घंटे का रह जाएगा. करीब 11 हजार 970 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर आधुनिक सुविधाएं, एलिवेटेड सड़कें और वाइल्डलाइफ सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं.

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11 हजार 970 करोड़ का एक्सप्रेसवे तैयार.(Photo: ITG) 11 हजार 970 करोड़ का एक्सप्रेसवे तैयार.(Photo: ITG)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:50 PM IST

दिल्ली से देहरादून के बीच बनने वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में है. करीब 210 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर लगभग बनकर तैयार हो चुका है और सिर्फ कुछ मामूली फिनिशिंग का काम बाकी है. काम पूरा होते ही इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय घटकर करीब 2.5 घंटे रह जाएगा, जबकि अभी यही सफर 6 से 7 घंटे में पूरा होता है.

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करीब 11 हजार 970 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक एक्सप्रेसवे को दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर कहा जा रहा है. इसका मकसद यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है. इस नए मार्ग से न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच संपर्क भी मजबूत होगा.

यह भी पढ़ें: दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर आया खुश होने वाला अपडेट, 6-7 घंटे का सफर अब सिर्फ 2.5 घंटे में...

दिल्ली से शुरुआत, एलिवेटेड हाईवे का अनुभव

इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत दिल्ली के अक्षरधाम से होती है. गीता कॉलोनी के पास से इसका एलिवेटेड हिस्सा शुरू होता है, जो आगे तक फैला हुआ है. छह लेन चौड़ा यह हाईवे बेहद आधुनिक है और उस पर सफर का अनुभव काफी आरामदायक बताया जा रहा है. एनएचएआई के इंजीनियर बलराम के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट को अलग-अलग पैकेज में बांटकर बनाया गया है, ताकि काम तेजी से पूरा हो सके.

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लोनी के पास इस कॉरिडोर पर पहला टोल बूथ बनाया गया है. पहले टोल से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी तक एंबुलेंस और हाईवे पेट्रोल की सुविधा मौजूद रहेगी. किसी भी तरह की परेशानी या हादसे की स्थिति में 1033 नंबर पर कॉल करने पर तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी.

पश्चिमी यूपी से होते हुए उत्तराखंड तक का सफर

दरअसल, यह एक्सप्रेसवे दिल्ली से निकलकर बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से होते हुए उत्तराखंड में प्रवेश करता है. कई हिस्सों में ट्रायल रन भी सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि बचा हुआ काम तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि इसे जल्द ही जनता के लिए खोला जा सके.

करीब 31 किलोमीटर की दूरी पर बागपत के पास इसी कॉरिडोर से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को जोड़ने का रास्ता भी दिया गया है. बागपत के आगे यह मार्ग पूरी तरह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कहलाता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हरे-भरे खेतों के बीच से गुजरता यह रास्ता यात्रियों को एक अलग ही अनुभव देता है.

आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षा के इंतजाम

हाईवे पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए आधुनिक इंतजाम किए गए हैं. एनएचएआई के इंजीनियर अंकित के मुताबिक, हर 30 किलोमीटर पर विशेष सुविधाएं दी जाएंगी, जहां खाने-पीने की व्यवस्था के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा भी होगी.

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हादसों को रोकने के लिए कई तकनीकी उपाय किए गए हैं. कॉरिडोर से निकलने वाले लूप पर मियावाकी तकनीक से पेड़ लगाए गए हैं. कोहरे और आपात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि ड्राइविंग सुरक्षित बनी रहे.

जंगल, पहाड़ और वाइल्डलाइफ की सुरक्षा

सहारनपुर के बाद उत्तराखंड में प्रवेश करते ही यह एक्सप्रेसवे एक बार फिर एलिवेटेड हो जाता है. सामने पहाड़, नीचे घने जंगल और ऊपर तेज रफ़्तार का सफर-यह नजारा यात्रियों के लिए खास होगा. यहां 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से गाड़ी चलाने का अनुभव अलग ही बताया जा रहा है.

इंजीनियर रोहित पवार के अनुसार, शिवालिक रेंज और राजाजी नेशनल पार्क के बीच से गुजरने वाले इस कॉरिडोर में वाइल्डलाइफ़ की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है. जानवरों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए, इसलिए यहां एलिवेटेड हाईवे बनाया गया है. साथ ही, साउंड बैरियर प्लास्टिक शीट लगाए गए हैं, ताकि रोशनी और आवाज जंगल के भीतर न जाए.

सुरंग, कला और देहरादून तक आसान पहुंच

वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की मदद से इस हाईवे पर ऐसी लाइटें लगाई गई हैं, जिनकी रोशनी रात के समय जानवरों को परेशान नहीं करती. हालांकि बंदरों को हाईवे पर आने से रोक पाना मुश्किल है, लेकिन हाथियों की आवाजाही के लिए विशेष एलिवेटेड रास्ते बनाए गए हैं.

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लगभग 300 मीटर लंबी सुरंग से होकर यह कॉरिडोर आगे बढ़ता है. इस सुरंग को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को दिखाने वाली तस्वीरों और कला कृतियों से सजाया गया है. सुरंग पार करने के कुछ ही मिनटों बाद देहरादून शहर आ जाता है और सफर समाप्त हो जाता है. कुल मिलाकर यह यात्रा ढाई घंटे से ज्यादा की नहीं रहती.

जल्द खुलेगा आम लोगों के लिए

अधिकारियों के मुताबिक, अब सिर्फ कुछ मामूली फिनिशिंग का काम बाकी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. इसके बाद दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा न सिर्फ तेज होगी, बल्कि सुरक्षित और सुविधाजनक भी बन जाएगी.

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