सरकारी लैब में घूस का खेल, मन मुताबिक टेस्ट रिपोर्ट के बदले करोड़ों की कमाई का आरोप

CBI ने बेंगलुरु में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में कार्रवाई करते हुए सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट के संयुक्त निदेशक को 9.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है. तलाशी में 3.76 करोड़ रुपये नकद और विदेशी मुद्रा बरामद हुई है. निजी कंपनी को फर्जी अनुकूल रिपोर्ट देने के बदले घूस लेने का आरोप है. एजेंसी को संदेह है कि बिजली उपकरणों की टेस्ट रिपोर्ट में हेरफेर कर बाजार में घटिया या मानकों पर खरे न उतरने वाले उत्पादों को मंजूरी दिलाई जा रही थी.

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रिपोर्ट के बदले रिश्वत मामले में सीबीआई ने की कार्रवाई (File Photo) रिपोर्ट के बदले रिश्वत मामले में सीबीआई ने की कार्रवाई (File Photo)

aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु स्थित Central Power Research Institute के संयुक्त निदेशक राजाराम मोहनराव चेन्नू को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है. 

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह गिरफ्तारी 9.5 लाख रुपये की रिश्वत के लेन-देन के दौरान की गई. मामले में एक निजी कंपनी सुधीर ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के निदेशक अतुल खन्ना को भी गिरफ्तार किया गया है.

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CBI का बड़ा भ्रष्टाचार खुलासा

CBI अधिकारियों के मुताबिक, चेन्नू पर आरोप है कि वह निजी कंपनियों के विद्युत उपकरणों को अनुकूल टेस्ट रिपोर्ट देने के बदले लगातार रिश्वत ले रहा था. शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामला दर्ज किया और 9 जनवरी 2026 को बेंगलुरु में जाल बिछाकर चेन्नू को एक निजी कंपनी के एक्जीक्यूटिव के साथ रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया.

गिरफ्तारी के बाद CBI ने चेन्नू के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें भारी मात्रा में कैश और विदेशी मुद्रा बरामद हुई. एजेंसी को उसके आवास से 3.59 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी मिली. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर, हांगकांग डॉलर, सिंगापुर डॉलर, इंडोनेशियाई रुपिया, मलेशियाई रिंगिट, यूरो, चीनी युआन (रेनमिनबी), स्वीडिश क्रोना और यूएई दिरहम समेत कई विदेशी मुद्राएं भी जब्त की गईं, जिनकी कुल कीमत 4 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है.

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9.5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा

CBI के प्रवक्ता ने बताया कि अब तक की तलाशी में विदेशी मुद्रा समेत करीब 3.76 करोड़ रुपये की बरामदगी हो चुकी है और तलाशी की कार्रवाई अभी जारी है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी अधिकारी लंबे समय से भ्रष्ट गतिविधियों में संलिप्त था और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग कर रहा था.

CBI इस बात की भी जांच कर रही है कि इस घूसकांड में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या यह नेटवर्क किसी बड़े रैकेट का हिस्सा है. एजेंसी को संदेह है कि बिजली उपकरणों की टेस्ट रिपोर्ट में हेरफेर कर बाजार में घटिया या मानकों पर खरे न उतरने वाले उत्पादों को मंजूरी दिलाई जा रही थी.

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. CBI का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

 

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