भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जब पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में वरिष्ठ नेता और संस्थापक सदस्यों में शामिल लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम मतदाता सूची में नहीं होगा. बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जिसके तहत देश भर से कुल 5708 निर्वाचक इस प्रक्रिया में शामिल होंगे. आवश्यकता पड़ने पर 20 जनवरी को मतदान कराया जाएगा.
बीजेपी की परंपरा रही है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव आम राय से होता है. इसी परंपरा के तहत इस बार भी चुनाव औपचारिक माना जा रहा है और नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय समझा जा रहा है. हालांकि इस चुनाव से जुड़ा एक तथ्य राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से खास माना जा रहा है. पार्टी की स्थापना वर्ष 1980 के बाद से यह पहली बार है, जब लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल का हिस्सा नहीं हैं.
राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव का कार्यक्रम घोषित, 5708 मतदाता करेंगे फैसला
बीजेपी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले संगठनात्मक चुनावों की एक तय प्रक्रिया होती है. सबसे पहले बूथ स्तर पर अध्यक्ष चुने जाते हैं, इसके बाद मंडल, जिला और फिर प्रदेश स्तर पर संगठन चुनाव होते हैं. इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्वाचन मंडल का गठन किया जाता है. इस निर्वाचन मंडल में राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं.
वर्तमान में बीजेपी के संगठन पर्व के तहत देशभर की प्रदेश इकाइयों में संगठन चुनाव चल रहे हैं. पार्टी संविधान के मुताबिक, कम से कम पचास प्रतिशत राज्यों में संगठन चुनाव पूरे होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जा सकता है. यह शर्त पूरी हो चुकी है, हालांकि अब भी कुछ राज्यों में संगठन चुनाव शेष हैं. इनमें कर्नाटक, हरियाणा, त्रिपुरा और दिल्ली शामिल हैं.
बीजेपी की परंपरा के अनुसार आमराय से होगा अध्यक्ष का चयन
लाल कृष्ण आडवाणी लंबे समय तक गांधीनगर से सांसद रहे हैं और इसी कारण वे गुजरात से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य के रूप में निर्वाचित होते आए थे. वर्ष 2021 में वे दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य बने थे. वहीं मुरली मनोहर जोशी भी कानपुर से सांसद रहने के दौरान उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य थे. सांसद न रहने के बाद वे भी दिल्ली से परिषद सदस्य निर्वाचित हुए थे.
इस बार स्थिति अलग है. दिल्ली प्रदेश संगठन के चुनाव अब तक पूरे नहीं हो सके हैं. इसी वजह से दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का निर्वाचन नहीं हो पाया है. चूंकि आडवाणी और जोशी दोनों ही फिलहाल दिल्ली से जुड़े परिषद सदस्य माने जाते थे, इसलिए वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हो सके हैं.
पहली बार आडवाणी और जोशी निर्वाचन मंडल से बाहर
गौर करने वाली बात यह भी है कि आडवाणी और जोशी दोनों ही नेताओं को पार्टी ने मार्गदर्शक मंडल में शामिल कर रखा है. वे संगठन के लिए मार्गदर्शक की भूमिका में हैं, लेकिन इस बार की चुनावी प्रक्रिया में उनकी औपचारिक भागीदारी नहीं होगी. बीजेपी अध्यक्ष चुनाव से जुड़ा यह बदलाव पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में आए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.
हिमांशु मिश्रा