'आपकी अपनी पार्टी' के भविष्य का फैसला फरवरी में करेगा दिल्ली HC

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि नई पार्टी को भी रजिस्टर करते वक्त इसका ध्यान रखा गया है और दोनों पार्टियों के बीच में भ्रम का कोई कारण हो ही नहीं सकता क्योंकि दोनों का नाम अलग अलग है.

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पूनम शर्मा / पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 13 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 10:12 PM IST

कुछ वक्त पहले चुनाव आयोग में रजिस्टर हुई एक पार्टी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए परेशानी बन कर आई. AAP के नेता इस पार्टी से इतने परेशान हुए कि वे सीधे दिल्ली हाई कोर्ट चले गए.  पूरा माजरा क्या है यह समझाने के लिए पहले हम आपको इस पार्टी का नाम बताते हैं.

चुनाव आयोग से रजिस्टर्ड हुई नई पार्टी का नाम है 'आपकी अपनी पार्टी' है.  संक्षेप में कहें तो AAP. दिल्ली में इस नाम से एक पार्टी पहले ही रजिस्टर्ड है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस पार्टी के कर्ताधर्ता हैं. इस पार्टी के रजिस्टर्ड होते ही आम आदमी पार्टी ने इस नए दल को यह कहकर कोर्ट में घसीट लिया कि इस पार्टी का नाम उनके दल से मिलता जुलता है और मतदाता वोट देते समय भ्रम में पड़ सकते हैं.

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जब मामला कोर्ट पहुंचा तो दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से इस मामले में जवाब मांगा. मंगलवार हुई सुनवाई में चुनाव आयोग ने कोर्ट को दिए अपने जवाब में बताया है कि जब भी वह कोई नई पार्टी रजिस्टर करती है तो उसके संक्षिप्त रूप (abbreviation) को देखकर नहीं बल्कि रजिस्टर होने वाली पार्टी के पूरे नाम को देखा जाता है. चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया नई पार्टी को भी रजिस्टर करते वक्त इसका ध्यान रखा गया है और दोनों पार्टियों के बीच में भ्रम का कोई कारण हो ही नहीं सकता क्योंकि दोनों का नाम अलग अलग है.

बहरहाल इस नए दल 'आपकी अपनी पार्टी' ने इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से कुछ और वक्त मांगा है. अदालत ने इस मामले में आपकी अपनी पार्टी और आम आदमी पार्टी को जवाब देने के लिए 22 फरवरी तक का वक्त दिया है.

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अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी  इस मामले को कोर्ट तक इसलिए ले गई है क्योंकि उन्हें लगता है कि मतदाता अगर इन दोनों पार्टियों के नाम से कंफ्यूज हुए तो इससे आम आदमी पार्टी के वोट आपकी अपनी पार्टी को जा सकते हैं.

याचिका में आम आदमी पार्टी की तरफ से गुहार लगाई गई है कि इस पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाए. इस मामले में अब फरवरी में सुनवाई होनी है. केजरीवाल की पार्टी के विरोध को देखते हुए आपकी अपनी पार्टी का भविष्य क्या होगा यह फरवरी में होने वाली सुनवाई से ही तय हो पाएगा.

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