छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव शहर के मुक्तिधाम में दाह संस्कार के बाद किसी और की अस्थि किसी अन्य परिवार के द्वारा विसर्जित किए जाने का मामला सामने आया है. अस्थि विसर्जन नहीं कर पाने वाले परिवार के लोगों ने आज मुक्तिधाम के बाहर आक्रोश व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
श्मशान से अस्थियां गायब
दरअसल, शहर के चिखली वार्ड नंबर 5 निवासी चौहान परिवार के 39 वर्षीय पुत्र पंकज सिंह चौहान का बीते रविवार को निधन हो गया था. उनके परिजनों ने रीति-रिवाज के साथ शाम लगभग 5 बजे मुक्तिधाम के शेड क्रमांक 2 में अपने पुत्र का दाह संस्कार किया. इसके बाद जब तीसरे दिन वह उसकी अस्थियां लेने पहुंचे तो अस्थियां गायब थी.
तीन नंबर वाले ले गए दो नंबर शेड की अस्थियां
यह देखते ही अस्थियां लेने पहुंचे परिजनों के होश फाकता हो गए. इसके बाद इस संबंध में पूछताछ करने से पता चला कि तीन नंबर में जिसके परिजन का अंतिम संस्कार किया गया था, उनके द्वारा दो नंबर शेड से अस्थियां ले जाई गई हैं. उनसे संपर्क करने पर पता चला की उन्होंने अस्थियां शिवनाथ नदी में विसर्जित कर दी हैं. इसके बाद चौहान परिवार के लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए गौशाला पिंजरापोल पर लापरवाही का आरोप लगाया.
मृतक के पिता प्रकाश सिंह चौहान ने कहा कि गौशाला पिंजरा पोल द्वारा केवल 31 सौ रुपये लेने से जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है. उनकी हर मामले में जवाबदारी बनती है. उन्होंने कहा कि हम अपने पुत्र की अस्थियां इलाहाबाद ले जाने वाले थे, रिजर्वेशन हो गया था सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं. उन्होंने इस मामले में कलेक्टर से गौशाला पिंजरा पोल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
परिवार ने कहा कि गलती हो गई
मृतक के भाई राहुल सिंह चौहान ने कहा कि रविवार सुबह लगभग 10 बजे उनके भाई की मृत्यु हुई थी और दोपहर लगभग 12 बजे हॉस्पिटल से उसका शव लाकर शाम 5 बजे दाह संस्कार किया गया. उन्होंने कहा कि नियम अनुसार तीन दिन में उसकी अस्थियां विसर्जन के लिए लेने आए थे लेकिन यहां कुछ भी नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि मुक्तिधाम प्रबंधन से बात की गई तो प्रबंधन का कहना है की जवाबदारी हमारी नहीं रहती है. वहीं अस्थियां ले जाने वाले परिवार ने कहा कि गलती हो गई है. ऐसे में अब हमारी भावनाओं का क्या होगा. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी इस तरह की घटना हो चुकी है अब भविष्य में दोबारा ऐसी घटना ना हो.
अस्थि विसर्जन से वंचित हुआ परिवार
अस्थी ले जाने के लिए एक परिवार से हुई भूल और प्रबंधन की लापरवाही के चलते दूसरे परिवार की भावनाएं आहत हुई है. वह अपने परिजन की अस्थि विसर्जन करने से भी वंचित हो गए हैं. इस घटना को देखते हुए भविष्य में इसकी पुर्नवृत्ति ना हो इस ओर ठोस कार्य किए जाने की आवश्यकता दिखाई देती है.
Input: परमानंद रजक
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