हॉस्टल की तीन आदिवासी नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने से मचा हड़कंप, कलेक्टर ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

बीजापुर जिले के गंगालूर गांव स्थित पोर्टा केबिन हाई स्कूल हॉस्टल की तीन नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं. कलेक्टर ने चार सदस्यीय समिति बनाई है जो सात दिन के भीतर रिपोर्ट देगी. मामले को लेकर विधानसभा में भी विपक्ष ने सरकार को घेरा.

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तीन नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने से मचा हड़कंप (Photo: Representational) तीन नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने से मचा हड़कंप (Photo: Representational)

aajtak.in

  • बीजापुर ,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:31 PM IST

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक सरकारी हॉस्टल से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि गंगालूर गांव के पोर्टा केबिन हाई स्कूल हॉस्टल की तीन नाबालिग छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं. इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.

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बीजापुर के कलेक्टर संबित मिश्रा द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह समिति मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों की जांच करेगी. रिपोर्ट में कहा गया था कि बीजापुर विकासखंड के गंगालूर स्थित पोर्टा केबिन हाई स्कूल हॉस्टल की तीन छात्राएं गर्भवती हैं. प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत जांच प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है.

तीन छात्राओं के गर्भवती होने की रिपोर्ट से हड़कंप

जांच के लिए बनाई गई समिति का नेतृत्व बीजापुर के अतिरिक्त कलेक्टर करेंगे. समिति में जनजातीय विकास विभाग के सहायक आयुक्त, बीजापुर के जिला शिक्षा अधिकारी और जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को भी सदस्य बनाया गया है. इस चार सदस्यीय समिति को पूरे मामले की जांच कर सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.

इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है. सोमवार को राज्य विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया. कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस घटना को दबाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि जैसे ही छात्राओं के गर्भवती होने की खबर सामने आई, तीनों को उनके घर भेज दिया गया और बाद में कहा गया कि वे हॉस्टल में मौजूद नहीं थीं.

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दो छात्राएं हॉस्टल में नहीं रहती थीं, घर से आती थीं स्कूल

कांग्रेस विधायकों ने यह भी कहा कि यह घटना अनुसूचित क्षेत्र में हुई है और यह बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि सरकारी हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है. विधायकों ने आरोप लगाया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच करने के बजाय दोषियों को बचाने की कोशिश की गई और छात्राओं को घर भेज दिया गया.

विधानसभा में लगाए गए इन आरोपों पर राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब दिया. उन्होंने बताया कि जिन तीन छात्राओं का जिक्र किया जा रहा है, उनमें से दो छात्राएं गंगालूर के स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल में पढ़ती हैं. ये छात्राएं 11वीं और 12वीं कक्षा की हैं और वे हॉस्टल में नहीं रहती थीं बल्कि अपने घर से रोजाना स्कूल आती-जाती थीं.

तीसरी छात्रा दिवाली छुट्टियों में घर गई थी, फिर हॉस्टल नहीं लौटी

मंत्री ने यह भी बताया कि तीसरी छात्रा 12वीं कक्षा की है और पहले गंगालूर के पोर्टा केबिन हॉस्टल में रहती थी. वह 18 अक्टूबर 2025 को दिवाली की छुट्टियों के दौरान अपने घर चली गई थी और उसके बाद वापस हॉस्टल नहीं लौटी. हालांकि मंत्री ने विधानसभा में दिए अपने जवाब में छात्राओं के गर्भवती होने के आरोपों पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की. फिलहाल जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए समिति बना दी है और अब उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

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