बिहार में शराबबंदी को लेकर बुधवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ. विपक्ष शराब तस्करी को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोशित नजर आया. आरजेडी कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि शराबबंदी पूरी तरह से फेल है और इससे राज्य को नुकसान हो रहा है.
प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी दलों ने वेल में आकर हंगामा शुरू कर दिया. कुछ विधायकों ने उस दौरान राइटर्स टेबल उठाना चाहा तब अध्यक्ष विजय सिन्हा ने चेतावनी देते हुए कहा कि पहले वाला मौसम नहीं है बाहर कर देंगे. अध्यक्ष की चेतावनी के बाद विधायक सकपका गए. अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार और विपक्ष अगर चाहे तो अलग से शराबबंदी पर चर्चा कराई जा सकती है.
आरजेडी ने शराब की तस्करी में संलिप्त थानेदार और एसपी को बर्खास्त करने की मांग की तो दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने दावा किया कि कोई विधायक यह नहीं कह सकता कि बिहार में शराब नहीं मिल रही हैं. इसलिए मुख्यमंत्री शराब को बैन नहीं बल्कि शराब की बिक्री करवाएं. उन्होंने कहा कि सरकार तीन गुने दाम पर राज्य में शराब की बिक्री करवाएं. इससे राजस्व भी मिलेगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शराबबंदी के सवाल पर ही भड़क जाते हैं.
एक स्थानीय न्यूज़ चैनल में शराबबंदी की पोल खोलते हुए स्टिंग ऑपरेशन को लेकर विपक्ष हंगामा कर रहा था. इस दौरान आरजेडी के विधायक वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में कोई भी राजनीतिज्ञ और अधिकारी रात को शराब पीए बिना नहीं सोता है. यही सच्चाई है. वीरेंद्र के बयान पर विधानसभा अध्यक्ष ने पूछा कि आपको कैसे पता और इतना जानते है तो दो चार का नाम भी बता दीजिए. लेकिन भाई बीरेंद्र ने जवाब नहीं दिया.
इस हंगामे पर सरकार की तरफ से जवाब देते हुए मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि सरकार ने कभी दावा नहीं किया कि शराब की एक बोतल भी नहीं बिक रही है लेकिन हमारा दावा ये जरूर है कि शराब पर सख्ती जारी रहेगी. उन्होंने विपक्ष से सवाल भी किया कि क्या आईपीसी कि धाराओ सें अपराध खत्म हो गया है.
मंगलवार को विधानसभा में चर्चा करते हुए मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि शराबबंदी केवल एक्ट नहीं बल्कि मुख्यमंत्री की इच्छाशक्ति है. लेकिन समाज के कुछ लोग अपने लाभ के लिये शराबबंदी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं. मुख्यमंत्री की इच्छाशक्ति को इसी से समझा जा सकता है कि अबतक 53 लाख लीटर से अधिक देसी और 57 लाख से अधिक विदेशी शराब जब्त की गई है. जिन गाड़ियों में शराब बरामद हुई उसे नीलम किया गया.
मंत्री ने कहा कि शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए 186 पुलिसकर्मियों और 8 उत्पादकर्मियों को बर्खास्त किया गया है. जो किसी राज्य में नहीं हुआ. 60 ऐसे पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया गया कि जो अगले 10 वर्षों तक थाना प्रभारी नहीं बन सकेंगे. मंत्री ने विपक्ष से शराबबंदी को और प्रभावी बनाने के लिए विपक्ष से सुझाव भी मांगें.
सुजीत झा