बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खिलाफ अलग-अलग मिजाज वाली पार्टियों को एक मंच पर लाने की पहल की. कोलकाता से चेन्नई और लखनऊ से दिल्ली तक एक करने के बाद वे अपनी कोशिश में सफल भी रहे. नीतीश की पहल पर शुरू हुई विपक्षी एकजुटता की कवायद अब 28 पार्टियों के इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस यानी INDIA गठबंधन के रूप में आकार भी ले चुकी है. लेकिन अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या बिहार में गठबंधनों का गणित बदलने वाला है? सूबे की सियासत बदलने वाली है?
विपक्षी गठबंधन की धुरी रहे नीतीश को लेकर अटकलों में कितना दम है, ये आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन घटनाक्रम कुछ इशारा कर रहा है. बीजेपी के नेता बार-बार ये जरूर कह रहे हैं कि नीतीश के लिए एनडीए के दरवाजे बंद हो गए हैं. खुद गृह मंत्री अमित शाह भी यही बात कह चुके हैं लेकिन सियासत में दोस्ती हो या दुश्मनी, स्थायी नहीं रहती. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पिछले दिनों कहा था कि हमने कभी किसी को नहीं छोड़ा. जो लोग हमें छोड़कर गए हैं, उनको तय करना है कि वे कब लौटते हैं. क्या नीतीश कुमार एनडीए में वापसी करेंगे? इन पांच संकेतों से कयास तो यही लगाए जा रहे हैं.
1- पीएम मोदी से गर्मजोशी के साथ मुलाकात
जी-20 सम्मेलन में शामिल होने आए राष्ट्राध्यक्षों के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से आयोजित डिनर में नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई. जेडीयू के एनडीए से अलग होने के बाद ये पहला मौका था जब नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले. दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखने को मिली और पीएम मोदी ने नीतीश को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से भी मिलवाया, उनका परिचय कराया.
पीएम मोदी और नीतीश की तस्वीरों के सामने आने के बाद बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी और एलजेपी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने तंज करते हुए कहा कि एनडीए में जगह खाली नहीं है. वहीं, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतनराम मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री जिस तरीके से नीतीश कुमार का अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से परिचय करा रहे हैं, उसमें कई संकेत छिपे हैं जो आने वाले समय में पता चलेंगे. मांझी के बयान के बाद ये चर्चा तेज हो गई कि वो संकेत कहीं नीतीश की एनडीए में वापसी तो नहीं?
2- रविवार के दिन केंद्र ने खोला खजाना
पीएम मोदी और नीतीश कुमार की मुलाकात शनिवार की रात हुई और अगले दिन रविवार का अवकाश होने के बावजूद केंद्र ने बिहार के लिए खजाने का मुंह खोल दिया. 15वें वित्त आयोग ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बिहार को 3884 करोड़ रुपये की राशि देने की अनुशंसा की थी. केंद्र ने रविवार के दिन पहली किस्त के 1942 करोड़ रुपये जारी कर दिए. इसे लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश और केंद्र की सत्ता पर काबिज एनडीए के बीच कम होती दूरी, दिल्ली दरबार से करीबी का संकेत माना जा रहा है.
3- पटना लौट जेडीयू नेताओं से संवाद करना
नीतीश कुमार जी-20 के डिनर से पटना लौटने के बाद एक्टिव नजर आए. पटना लौटने के बाद नीतीश कुमार ने जेडीयू नेताओं के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा के लिए बैठक की. सीएम नीतीश ने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की और जिलाध्यक्षों को टिकट को लेकर आश्वासन भी दिया. सीएम ने कहा कि किसी को इधर उधर जाने की जरूरत नहीं है. नीतीश की सामान्य नजर आने वाली इस बैठक में सियासत बदलने के संकेत क्या हैं?
नीतीश कुमार की सियासत को करीब से देखने, जानने और समझने वाले लोग बताते हैं कि वे जब भी कोई बड़ा फैसला लेते हैं. अपनी पार्टी के नेताओं से संवाद जरूर करते हैं. नीतीश ने अपने नेताओं को टिकट के लिए इधर-उधर न जाने की नसीहत और आश्वासन, दोनों दे तो दिया है लेकिन ऐसा मुमकिन कैसे होगा? सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या ये नीतीश के अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत है?
4- इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले ललन सिंह का 'बीमार' हो जाना
विपक्षी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस यानी इंडिया गठबंधन की कोऑर्डिनेशन कमेटी की पहली मीटिंग शरद पवार के आवास पर होनी है. जेडीयू की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह कोऑर्डिनेशन कमेटी में हैं. नीतीश कुमार ने ही विपक्षी दलों को एकजुट कर एक मंच पर लाने की पहल की थी. पहली कोऑर्डिनेशन बैठक से पहले ललन सिंह के 'बीमार' होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
5- लालू परिवार पर लैंड फॉर जॉब घोटाले में कसा शिकंजा
लैंड फोर जॉब मामले में लालू यादव और उनके परिवार पर शिकंजा कस गया है. गृह मंत्रालय ने सीबीआई की ओर दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट के आधार पर पूर्व रेल मंत्री लालू यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत दे दी है. सप्लीमेंट्री चार्जशीट में लालू यादव और राबड़ी देवी के साथ ही बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत 16 लोगों के नाम हैं.
परिस्थितियां करीब-करीब 2017 जैसी ही बन गई हैं जब नीतीश ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला लिया था. तब आईआरसीटीसी घोटाले में तेजस्वी का नाम उछला था और अंतरात्मा की आवाज पर सुशासन बाबू ने अपनी राहें आरजेडी से अलग कर ली थीं. अब तो एक घोटाले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट तक दायर हो चुकी है. ऐसे में जेडीयू और आरजेडी गठबंधन के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
बिकेश तिवारी