कोरोना का इलाज करने के लिए आगे नहीं आ रहे बिहार के निजी अस्पताल, सरकार को नहीं दी जानकारी

सरकारी अस्पतालों पर लगातार पड़ रहे दबाव के बीच बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों से आवेदन मांगे थे जिसमें इस बात की जानकारी मांगी गई थी कि निजी अस्पतालों के पास कोविड-19 मरीजों का इलाज करने के लिए किस तरीके के संसाधन मौजूद हैं.

Advertisement
कोरोना के तेजी से बढ़ रहे हैं मामले (फाइल फोटो) कोरोना के तेजी से बढ़ रहे हैं मामले (फाइल फोटो)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 14 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 10:44 PM IST

  • बिहार के किसी भी निजी अस्पताल ने सरकार को जवाब नहीं दिया
  • निजी अस्पतालों से कोरोना के इलाज को लेकर जानकारी मांगी गई

बिहार में लगातार बढ़ रहे कोविड-19 के मामले को लेकर राज्य सरकार ने रविवार को निजी अस्पतालों से आवेदन मांगे थे जहां पर कोविड-19 के मरीजों का इलाज हो सकता है. लेकिन सोमवार शाम तक बिहार के किसी भी निजी अस्पताल में इसका जवाब नहीं दिया.

Advertisement

सरकारी अस्पतालों पर लगातार पड़ रहे दबाव के बीच बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों से आवेदन मांगे थे जिसमें इस बात की जानकारी मांगी गई थी कि निजी अस्पतालों के पास कोविड-19 मरीजों का इलाज करने के लिए किस तरीके के संसाधन मौजूद हैं. साथ ही अस्पताल में कितने डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हैं.

कोविड-19 मरीजों का इलाज करने में दिलचस्पी नहीं

सरकार के इस आग्रह के बावजूद भी बिहार के किसी भी निजी अस्पताल ने इसका जवाब नहीं दिया. स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि निजी अस्पताल इस आवेदन को अपने अपने जिले के सिविल सर्जन को भेज सकते हैं.

गौरतलब है, राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि निजी अस्पतालों में कोविड-19 का इलाज कराने वाले मरीज इलाज का खर्चा खुद उठाएंगे मगर इसके बावजूद किसी भी निजी अस्पताल में कोविड-19 मरीजों का इलाज करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

Advertisement

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें

पटना के एक बड़े निजी अस्पताल 'रूबन' के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर सत्यजीत सिंह का कहना है कि यूरोप के देशों का जो अनुभव है उसके मुताबिक एक ही अस्पताल में जहां पर दूसरे मरीजों का इलाज हो रहा है और वहीं पर कोविड-19 के मरीजों का इलाज होने का नतीजा काफी खतरनाक रहा है.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

निजी अस्पतालों से केवल मदद मांगी

यूरोप के देशों का अनुभव रहा है कि एक ही अस्पताल में आम मरीज और कोविड-19 मरीजों का इलाज होने से संक्रमण डॉक्टर और मरीज में और ज्यादा फैलता है. ऐसी गलती भारत में नहीं होनी चाहिए. अस्पताल पूरी तरीके से कोविड-19 मरीजों के लिए होना चाहिए या फिर दूसरी बीमारियों के लिए होना चाहिए. ऐसा नहीं होना चाहिए कि कोविड-19 इलाज के दौरान दूसरे मरीजों की मौत हो जाए.

देश-दुनिया के किस हिस्से में कितना है कोरोना का कहर? यहां क्लिक कर देखें

सत्यजीत सिंह बताते हैं कि अगर किसी निजी अस्पताल के पास दो या तीन अलग-अलग ब्लॉक हों तो उनमें से एक ब्लॉक को कोविड-19 ब्लॉक के रूप में बनाया जा सकता है. डॉक्टर सिंह बताते हैं कि उनके खुद के अस्पताल में अलग-अलग ब्लॉक की सुविधा नहीं है और अगर वह कोविड-19 के मरीजों को भर्ती करते हैं तो दूसरे मरीजों को नुकसान होगा.

Advertisement

जानकारी के मुताबिक, स्वास्थ विभाग ने कोविड-19 के मरीजों की जांच करने के लिए निजी अस्पतालों से केवल मदद मांगी थी. राज्य सरकार का ऐसे निजी अस्पतालों को संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए कोई भी फरमान जारी करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement