जानिए क्या है लखीसराय का पूरा मामला, जिसे लेकर स्पीकर और नीतीश कुमार में हो गई भिड़ंत?

बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और स्पीकर विजय सिन्हा के बीच हुई तीखी तकरार ने अब सियासी रंग ले लिया है. गठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है.

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 4:55 PM IST
  • सरस्वती पूजा के दौरान कोरोना उल्लंघन के केस से जुड़े हैं तार
  • स्पीकर ने पुलिस अधिकारियों पर लगाया था गलत बर्ताव का आरोप

बिहार विधानसभा के चालू सत्र के दौरान 14 मार्च को सदन में एक ऐसी घटना घटी जिसने सूबे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के भविष्य को लेकर अटकलों को हवा दे दी है. बिहार विधानसभा में शायद ऐसा पहली दफे हुआ जब मुख्यमंत्री यानी नेता सदन और स्पीकर ही किसी मसले पर आमने-सामने आ गए हों. विपक्ष तंज कर रहा है तो वहीं सत्ताधारी गठबंधन के दो घटक दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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सरकार का भविष्य क्या होगा, ये तो वक्त बताएगा लेकिन आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा कौन सा मसला था जिसपर दो संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं में तीखी बहस हो गई. पूरे मामले की तह तक जाने के लिए हमें उस दिन विधानसभा की कार्यवाही के साथ ही कुछ दिनों पहले स्पीकर विजय कुमार सिन्हा के लखीसराय दौरे और सरस्वती पूजा के दौरान हुए घटनाक्रमों की भी बात करनी होगी.

सरावगी ने स्पीकर के साथ गलत व्यवहार का मसला उठाया

बीजेपी विधायक संजय सरावगी ने प्रश्नकाल के दौरान लखीसराय में इस साल यानी 2022 के शुरुआती 50 दिन में ही नौ लोगों की हत्या और सरस्वती पूजा के समय स्पीकर के साथ गलत बर्ताव का मसला उठाया. संजय सरावगी के सवाल पर सरकार की ओर से मंत्री बिजेंद्र यादव ने जवाब दिया. सरकार ने ये माना कि लखीसराय में साल के शुरुआती 50 दिन में आठ लोगों की हत्या हुई है. साथ ही ये भी जोड़ा कि इनमें से तीन की हत्या ही अपराधियों ने की है.

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स्पीकर के साथ पुलिसकर्मियों के गलत बर्ताव पर सरकार की ओर से कार्रवाई की बात भी कही गई. मंत्री के जवाब से बीजेपी विधायक संतुष्ट नहीं हुए. सरावगी और सवाल करने लगे. स्पीकर विजय सिन्हा ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और निर्दोषों को पकड़ने के आरोप लगाए. सवाल जवाब का सिलसिला चल ही रहा था कि सीएम नीतीश पहुंचे और कई दिन से एक ही मसले को उठाए जाने पर बिफर पड़े.

सीएम नीतीश ने सदन की कार्यवाही को लेकर सवाल उठाए और कहा कि एक ही मामले को हर रोज उठाने का कोई मतलब नहीं है. नीतीश ने साथ ही ये भी कहा कि यह मामला विशेषाधिकार समिति को दिया गया है. विशेषाधिकार समित जो रिपोर्ट पेश करेगी, उस रिपोर्ट पर जरूर विचार किया जाएगा. हम ये देखेंगे कि कौन सा पक्ष सही है. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि जो जिसका अधिकार है, उसे ही करने दीजिए.

क्या है सरस्वती पूजा का मसला

लखीसराय में सरस्वती पूजा के दौरान बड़हिया के टाल क्षेत्र में आर्केस्ट्रा का आयोजन हुआ था. सरस्वती पूजा के बाद पुलिस ने कोरोना गाइडलाइंस के उल्लंघन से संबंधित मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इसकी शिकायत क्षेत्रीय विधायक स्पीकर विजय कुमार सिन्हा तक पहुंची. कहा ये गया कि पुलिस ने दोषियों को पकड़ने की बजाय आर्केस्ट्रा देखने गए व्यक्ति को पकड़ा.

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स्पीकर इस मामले में सक्रिय हुए. तब लखीसराय के पुलिस अधीक्षक अवकाश पर थे और एसडीओपी रंजन कुमार प्रभारी पुलिस अधीक्षक थे. स्पीकर ने पुलिस अधिकारियों पर अपने साथ गलत बर्ताव का आरोप लगाया. विधानसभा अध्यक्ष ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ये भी कहा था कि लखीसराय को चारागाह नहीं बनने देंगे.

जुबानी जंग से हटकर स्पीकर ने विशेषाधिकार हनन को लेकर गृह सचिव और डीजीपी को भी तलब किया. साथ ही विशेषाधिकार हनन समिति को जांच सौंप दी. बिहार विधानसभा में यही मसला पिछले कई दिनों से हर रोज उठाया जा रहा था. कभी विपक्षी दलों के नेता तो कभी बीजेपी के विधायक, हर रोज उठते इसी मामले को लेकर सीएम नीतीश सदन में बिफर पड़े.

 

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