बिहारः मंत्री प्रचार में बिजी थीं, सचिव ने जारी किया अपने दौरे का प्रोटोकॉल

नीतीश कुमार खुद भी प्रोटोकॉल फॉलो के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उन्हीं की सरकार के एक मंत्री ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रोटोकॉल का माखौल उड़ाया है.

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (PTI) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (PTI)

सुजीत झा

  • पटना,
  • 24 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

  • अधिकारियों को अनिवार्य उपस्थिति का दिया निर्देश
  • गन्ना उद्योग मंत्री बीमा भारती ने दौरे पर दी सफाई

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार सुशासन के दावे करती है. नीतीश कुमार खुद भी प्रोटोकॉल अनुशासन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उन्हीं की सरकार के एक मंत्री ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रोटोकॉल का माखौल उड़ाया है. प्रदेश के गन्ना उद्योग विभाग की मंत्री बीमा भारती के आप्त सचिव ने अपने दौरे का प्रोटोकॉल जारी किया है, जो प्रोटोकॉल के दायरे में ही नहीं आते.

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आप्त सचिव ने अपने दौरे का प्रोटोकॉल संबंधित विभाग के अधिकारियों को भेज कर यह जता दिया है कि सुशासन बाबू की सरकार में प्रोटोकॉल की क्या स्थिति है. प्रोटोकॉल के मुताबिक मंत्री महोदया दौरे पर नहीं जा रही हैं, बल्कि उनके आप्त सचिव राजा रमण भास्कर पूर्वी और पश्चिमी चंपारण की चीनी मिलों का दौरा करने जा रहे हैं. दूसरी तरफ इस मामले में मंत्री बीमा भारती ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव प्रचार में जाना था, इसलिए अपने निजी आप्त सचिव को दौरे पर भेजा.

क्या है प्रोटोकॉल में

गन्ना उद्योग मंत्री के आप्त सचिव की ओर से भेजे गए प्रोटोकॉल में लिखा गया है कि माननीया गन्ना उद्योग मंत्री के आप्त सचिव राजा रमण भास्कर का पूर्वी चम्पारण और पश्चिम चम्पारण में स्थित चीनी मिलों का भ्रमण कार्यक्रम 20 अक्टूबर से लेकर 23 अक्टूबर तक है. प्रोटोकॉल में वह कहां कहां जाएंगे और कब कहां रात्रि विश्राम करेंगे, उसकी पूरी जानकारी ठीक उसी तरह दी गई है जैसे मंत्रियों के लिए दी जाती है.

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जारी नहीं होता प्रोटोकॉल

गौरतलब है कि राज्य सरकारों के मंत्रियों को छोड़कर उनके सचिव आदि के दौरों का प्रोटोकॉल जारी नहीं होता. यह पहला अवसर है जब बिहार सरकार के किसी मंत्री के निजी आप्त सचिव के दौरे का प्रोटोकॉल जारी किया गया है. बता दें कि बिहार सरकार के मंत्रियों को दो आप्त सचिव मिलते हैं. एक तो डिप्टी कलेक्टर रैंक का अधिकारी होता है और दूसरा निजी आप्त सचिव रखने की सुविधा दी जाती है. जिस आप्त सचिव ने अपने दौरे का प्रोटोकॉल जारी किया है, वह निजी आप्त सचिव ही हैं.

सवाल किए जा रहे हैं कि आखिर एक आप्त सचिव कैसे मंत्री का दर्जा पा सकता है, कैसे वो बड़े अधिकारियों और चीनी मिलों के महाप्रबंधक और कार्यपालक अध्यक्षों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दे सकता है. इस मामले की जांच की मांग भी उठने लगी है. अधिकारी भी दबी जुबान में इस मामले की जांच की वकालत कर रहे हैं.

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