450 रुपये प्रति हफ्ते में वेट लॉस! भारत में वजन घटाने की दवा सस्ती, डॉक्टर्स ने दी चेतावनी

भारत में सेमाग्लूटाइड के जेनेरिक वर्जन की एंट्री हो चुकी है, जिससे इसकी कीमत 90% तक गिर गई है. लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना खतरनाक साबित हो सकता है.

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वेट लॉस दवा सीधे दिमाग और पेट पर असर करती हैं. (Photo: ITG) वेट लॉस दवा सीधे दिमाग और पेट पर असर करती हैं. (Photo: ITG)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST

दुनिया भर में वजन घटाने वाली 'जादुई दवा' के रूप में फेमस हुई सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) अब भारत में बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध होने जा रही है. 20 मार्च को इस दवा का पेटेंट खत्म होने के बाद नैटको फार्मा और अल्केम लेबोरेटरीज जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों ने इसके जेनेरिक वर्जन बाजार में उतार दिए हैं. जहां पहले इसके लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे, वहीं अब यह बेहद कम कीमत पर उपलब्ध होगी.

पहले इसके एक महीने के डोज की कीमत करीब 9 हजार से 28 हजार रुपये तक होती थी, अब उनकी कीमत मात्र 1,290 रुपये से शुरू हो रही है. लेकिन सस्ती होने का मतलब ये नहीं है कि कोई भी इन्हें लेना शुरू कर दे. देश के दिग्गज डॉक्टरों का कहना है कि इसे बिना सोचे-समझे लेना जानलेवा भी हो सकता है. 

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कीमतों में भारी गिरावट

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की बड़ी फार्मा कंपनियों ने सेमाग्लूटाइड के जेनेरिक वर्जन को लॉन्च कर दिया है. नैटको फार्मा ने सेमानत (Semanat) और सेमाफुल (Semafull) ब्रांड नाम से इसे बाजार में उतारा है, जिसकी शुरुआती कीमत केवल 1,290 रुपये प्रति माह है. 

वहीं, अल्केम लेबोरेटरीज ने सेमासाइज (Semasize) और ओबेसेमा (Obesema) जैसे नाम से प्री-फिल्ड पेन लॉन्च किए हैं जिनकी साप्ताहिक लागत करीब 450 रुपये आएगी. इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, यह कीमतों में लगभग 70 से 90 फीसदी की कटौती है, जो भारत जैसे देश में जहां करोड़ों लोग मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, एक बड़ी राहत की खबर है.

डॉक्टरों ने दी चेतावनी

सस्ती दवा का मतलब यह कतई नहीं है कि इसे हर कोई इस्तेमाल कर सकता है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में देश के जाने-माने डायबिटीज विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यह दवा केवल उन लोगों के लिए है जो गंभीर रूप से मोटे हैं या जिन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां हैं. 

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डॉ. वी. मोहन जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा दिमाग और पेट पर सीधा असर करती है. इसके गलत इस्तेमाल से 'पैंक्रियाटाइटिस' (अग्न्याशय में सूजन), किडनी की समस्या और यहां तक कि थायराइड कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है.

WHO ने जारी किया नकली दवाओं का अलर्ट

दवा की बढ़ती मांग और इसकी लोकप्रियता को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने भी अलर्ट जारी किया है. WHO के मुताबिक, दुनिया के कई देशों में नकली सेमाग्लूटाइड (ब्रांड नाम ओज़ेम्पिक) के बैच पकड़े गए हैं. 

नकली दवाओं में सही मात्रा न होने या दूषित पदार्थों के होने से जान को खतरा हो सकता है. भारत में भी ड्रग कंट्रोलर (CDSCO) ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यह दवा केवल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जाए. जिम इंस्ट्रक्टर या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सलाह पर इसे लेना भारी पड़ सकता है.

सावधानी ही बचाव है

विदेशी हेल्थ वेबसाइट्स जैसे मेडिकल न्यूज टुडे की मानें तो इस दवा के सामान्य साइड इफेक्ट्स में मतली, उल्टी और दस्त शामिल हैं, लेकिन गंभीर मामलों में यह आंखों की रोशनी जाने (NAION) का कारण भी बन सकती है. 

भारत के ड्रग रेगुलेटर अब ऑनलाइन फार्मेसी और दुकानों पर इसकी अवैध बिक्री को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रख रहे हैं. एक्सपर्ट्स का स्पष्ट संदेश है, यह एक जीवन रक्षक दवा है लेकिन लाइफस्टाइल प्रोडक्ट नहीं जिसे कोई भी कभी भी ले सके.

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