वरुण धवन की बेटी को हिप्स ज्वाइंट की बीमारी...समय रहते पहचानें लक्षण, वरना बिगड़ सकता है चाल

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने पहली बार अपनी 2 साल की बेटी की हेल्थ से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है. उनकी बच्ची डेवलपमेंट डिप्लेशिया ऑफ द हिप (DDH) से जूझ रही है. यह बच्चों में होने वाली ऐसी समस्या है, जो समय पर पहचान और इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकती है.

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 वरुण धवन की बेटी 2 साल की है. (Photo: Instagram/Varun Dhawan) वरुण धवन की बेटी 2 साल की है. (Photo: Instagram/Varun Dhawan)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:20 PM IST

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने अपनी 2 साल की बेटी की हेल्थ प्रॉब्लम शेयर की है. उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया है कि उनकी 2 साल की बेटी डेवलपमेंट डिप्लेशिया ऑफ द हिप (DDH) नाम की समस्या से जूझ रही है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे के कूल्हे का जोड़ सही तरीके से विकसित नहीं होता. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह बच्चे के चलने-फिरने पर असर डाल सकती है. हालांकि यदि समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो सही ट्रीटमेंट से ये ठीक भी हो सकती है. ये बीमारी क्या है और इसे कैसे पहचाना जा सकता है इस बारे में भी जान लीजिए.

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क्या है डेवलपमेंट डिप्लेशिया ऑफ द हिप?

Moneycontrol के मुताबिक, वरुण ने इस बीमारी के बारे में बात करते हुए कहा कि मैं चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस बीमारी के बारे में जागरूक हों, ताकि समय रहते बच्चों का सही इलाज हो सके.

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, DDH एक ऐसी स्थिति है जिसमें कूल्हे का जॉइंट सामान्य तरीके से विकसित नहीं होते. इसमें जांघ की हड्डी का ऊपरी हिस्सा (फेमोरल हेड) हिप सॉकेट में सही से फिट नहीं बैठता या ढीला रहता है. ये स्थिति जन्म के समय मौजूद हो सकती है या बच्चे के शुरुआती ग्रोथ के दौरान भी सामने आ सकती है. 

DDH के कारण और लक्षण क्या हैं?

Mayo Clinic के मुताबिक, अगर बच्चा गर्भ में उल्टी स्थिति (ब्रीच पोजिशन) में रहा हो, परिवार में पहले से यह समस्या रही हो या गर्भ में जगह कम हो, तो DDH का खतरा बढ़ जाता है. यह समस्या लड़कियों में ज्यादा देखी जाती है.

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DDH के लक्षण शुरुआती दौर में समझना आसान नहीं होता लेकिन कुछ संकेत मदद कर सकते हैं. जैसे बच्चे के दोनों पैरों की लंबाई में फर्क दिखना, जांघ या कूल्हे पर स्किन फोल्ड्स का असमान होना, चलने में लंगड़ापन या चलना देर से शुरू होना. ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

डीडीएच का इलाज कैसे होता है?

डीडीएच के इलाज की बात करें तो यह पूरी तरह बच्चे की उम्र और समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है. छोटे बच्चों में आमतौर पर हार्नेस या ब्रेस की मदद से हिप जॉइंट को सही स्थिति में लाया जाता है. वहीं, बड़े बच्चों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है. रिपोर्ट्स का कहना है कि अगर समय पर इलाज शुरू हो जाए तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है.

लेकिन यदि DDH का इलाज समय पर न किया जाए तो आगे चलकर जोड़ों में दर्द, चलने में स्थायी दिक्कत और आर्थराइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए पैरेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे बच्चों के चलने-फिरने और फिजिकल ग्रोथ पर नजर रखें और कुछ भी असामान्यता होने पर तुरंत मेडिकल सलाह लें.

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