Sleep Cycle Tips: आज के समय में अक्सर लोग अपनी नींद से समझौता करते हैं और देर रात सोते हैं. कोई ऑफिस के काम की वजह से देर रात तक जागता है तो कोई जल्दी उठने के कारण सुबह जल्दी के अलार्म लगा लेता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका शरीर को किस चीज की अधिक जरूरत है? रिपोर्ट के मुताबिक, नींद का सीधा संबंध आपकी घड़ी से नहीं, बल्कि आपके शरीर के सर्केडियन रिदम से है. अगर यह तालमेल बिगड़ जाए तो 8 घंटे की नींद भी आपको बीमार बना सकती है.
हमारे दिमाग में एक मास्टर क्लॉक होती है जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं. यह रोशनी और अंधेरे के हिसाब से शरीर को संकेत देती है कि कब जागना है और कब सोना है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च बताती है कि यह रिदम मेलाटोनिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स को कंट्रोल करती है.
जब कोई इस नेचुरल सर्केडियम रिदम के विपरीत सोता है या जागता है तो शरीर अंदरूनी रूप से थकने लगता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुबह जल्दी उठना अच्छा है क्योंकि सूरज की रोशनी शरीर को रिचार्ज करती है लेकिन इसके लिए रात की नींद पूरी होना भी उतना ही जरूरी है.
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. समीर गार्डे का कहना है, जो लोग देर रात तक जागते हैं और सुबह जल्दी उठ जाते हैं, उनको गहरी नींद नहीं मिलती. यह वही समय है जब हमारे मसल्स की रिकवरी होती है और शरीर में ऑक्सीजन लेवल सही रहता है. इसकी कमी से खासकर अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी वाले मरीजों को गंभीर समस्या हो सकती है. नींद की कमी से शरीर में सूजन बढ़ती है जिससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और आप जल्दी संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं.
डॉक्टरों का कहना है कि देर से सोना या जल्दी उठना मुख्य मुद्दा नहीं है, बल्कि नियमितता है. आपका शरीर 7 से 9 घंटे की क्वालिटी नींद मांगता है. यदि आप रोज रात 12 बजे सोते हैं और सुबह 8 बजे उठते हैं तो यह उस रूटीन से बेहतर है जिसमें आप कभी जल्दी सोते हैं और कभी बहुत देर से. शरीर को एक तय रूटीन पसंद है इसलिए अपनी स्लीप साइकिल को फिक्स करें और कोशिश करें कि सोने और जागने का समय हर दिन एक जैसा हो.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क