उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साहित्य आजतक 2026 उत्सव का आज दूसरा दिन है. साहित्य आजतक के एक सेशन 'विन ओवर वेट' में कुछ जाने-माने मेडिकल एक्सपर्ट्स भी शामिल हुए जिन्होंने इस दौरान मोटापे और डायबिटीज से जुड़े विषय, इसके पीछे की साइंस, मिथकों और इससे कैसे बचा जाए, इस पर चर्चा की.
इस पैनल डिस्कशन को सीनियर जर्नलिस्ट सोनल मेहरोत्रा कपूर ने मॉडरेट किया था. इस सेशन में लखनऊ के एवरग्रीन मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. राजीव अवस्थी ने देश में बढ़ रहे मोटापे पर चर्चा करते हुए बताया, 'मोटापा केवल दिखने तक सीमित नहीं है कि अगर शेप बिगड़ गया है तो ही मोटापा है. मोटापा को सारे संसार ने एक बीमारी के तौर पर स्वीकार किया है. कई लोग हेल्दी ओबेसिटी में कनफ्यूज हो जाते हैं. हेल्दी ओबेसिटी जैसा कुछ नहीं होता. मेडिकल साइंस की रिसर्च में पता चलता है कि 230 कंडीशन मोटापे से जुड़ी हैं.'
'बिना डायबिटीज और ब्लड्रेशर हाई हुए भी मोटापे से जुड़ी कई बीमारियां इंसान को हो सकती है. मोटे आदमी को किसी भी कारण से समान वजन वाले व्यक्ति की तुलनामें 23 पर्सेंट ज्यादा मरने का खतरा होता है.'
पैनल ने बताया कि मोटापे से टाइप 2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर का खतरा काफी बढ़ जाता है. भारत में पहले से ही डायबिटीज के मरीजों की संख्या काफी है और ज्यादा वजन इसका एक सबसे बड़ा कारण है.
डॉ. राजीव अवस्थी कहते हैं कि समय के साथ अनकंट्रोल्ड ब्लड शुगर दिल, किडनी और आंखों जैसे अंगों को नुकसान पहुंचाती है, शुरुआती स्क्रीनिंग, रेगुलर चेक-अप और सही दवा बहुत जरूरी हैं.
मोटापा हर किसी को घेर रहा
मोटापा अब सिर्फ बड़े शहरों या किसी खास उम्र के ग्रुप तक ही सीमित नहीं रहा. बच्चों से लेकर काम करने वाले प्रोफेशनल्स और बुज़ुर्गों तक वजन से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स तेजी से बढ़ रही हैं.
मोटापा खाते-पीते घर की निशानी नहीं
इस सेशन में मौजूद मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन और दिल के डॉक्टर नकुल सिन्हा बताते हैं, 'मैं दिल का डॉक्टर हूं और मैं बता सकता हूं कि दिल की बीमारी में लक्षण सबसे आखिर में दिखते हैं, चाहें वो मोटा हो या ना हो. मोटापा दिल की बीमारियों का गेटवे है और किसी को ये है तो उसे दिल के रोग होनो का ज्यादा खतरा है. मोटापा क्या है. आप जो एनर्जी लेते हैं. उसे खर्च नहीं कर पाते हैं तो वो स्टोर हो जाती है. अगर ज्यादा बर्न नहीं कर पाए तो फैट के रूप में जमा होने लगती है. जब ये बढ़ता है तो आपके शरीर में दिक्कत पैदा करता है.'
लखनऊ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी इंस्टीट्यूट और आशीर्वाद हेल्थकेयर के डायरेक्टर डॉ. प्रशांत वर्मा से जब पूछा गया कि गट माइक्रोबायोम ठीक कैसे करें, उसका कैसे रिलेशन मोटापा से, इस पर डॉक्टर प्रशांत ने कहा, 'गट माइक्रोबायोम मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है और वो मोटापे पर असर डालता है. इनमें इंबैलेंस होता है तो बहुत सारे बदलाव शरीर में आते हैं. कई सारे हार्मोन्स जो गट में बनते हैं, उनके प्रोडक्शन को इंबैलेंस कम कर देता है जिससे कई दिक्कतें होती हैं.'
क्या मोटापा लंग्स को भी प्रभावित करता है. इस पर रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मिडलैंड हेल्थकेयर में फाउंडर और हेड डॉ. बी. पी. सिंह कहते हैं, 'बढ़ता हुआ प्रदूषण फेफड़ों को प्रभावित करता है. बढ़ता हुआ प्रदूषण आपके मोटापे को भी बढ़ाता है. इससे सांस लेने का रास्ता संकरा हो जाता है. चर्बी से मांसपेशियों में कमजोरी आती है तो सांस लेने में दिक्कत होती है. मोटाबॉलिज्म भी खराब होता है तो कुल मिलाकर ये फेफड़ों पर भी असर डालता है. किसी को अस्थमा है तो मोटापे में ये और बिगड़ जाता है.'
मोटापा एक बीमारी है, सिर्फ ज्यादा वजन नहीं
पैनल ने इस दौरान एक सबसे साफ संदेश दिया कि मोटापा एक बीमारी है. यह सिर्फ बहुत ज्यादा खाने या एक्सरसाइज न करने के बारे में नहीं है. इसमें लाइफस्टाइल एक बड़ी भूमिका निभाता है. वहीं जेनेटिक्स और मेटाबॉलिज्म भी शरीर के वजन पर असर डालते हैं.
नई दवाएं: मददगार लेकिन जादुई नहीं
इस चर्चा में GLP-1-बेस्ड दवाइयों जैसे मॉडर्न इलाज पर भी बात हुई जिनका इस्तेमाल अब वजन घटाने के लिए किया जा रहा है. ये दवाएं असल में डायबिटीज के लिए बनाई गई थीं लेकिन कुछ मरीजों को मेडिकल देखरेख में वजन कम करने में मदद कर रही हैं.
हालांकि, एक्सपर्ट्स ने साफ कहा कि ये दवाएं जादुई इंजेक्शन नहीं हैं. इन्हें डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही लेना चाहिए और हमेशा डाइट कंट्रोल और फिजिकल एक्टिविटी के साथ लेना चाहिए. खुद से दवा लेना रिस्की हो सकता है.
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