Reducing edible oil consumption benefits: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपनी लाइफस्टाइल में एक छोटा लेकिन प्रभावी बदलाव करने का आग्रह किया है और वो है खाने के तेल में 10 प्रतिशत की कटौती. पीएम का यह सुझाव बल्कि इसके पीछे एक बड़ा आर्थिक और हेल्थ लॉजिक छिपा है. दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत खाने वाला तेल दूसरे देशों से खरीदता है. यदि हम अपने किचन में इस्तेमाल होने वाले तेल का उपयोग थोड़ा कम कर दें तो इसका सीधा असर हमारे कोलेस्ट्रॉल लेवल और देश के विदेशी मुद्रा भंडार, दोनों पर पड़ेगा.
भारत दुनिया में खाद्य तेल का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है. भारत के कुल खाद्य तेल इम्पोर्ट बास्केट में पाम ऑयल की हिस्सेदारी 45-60 प्रतिशत तक रहती है जो मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत हर साल खाद्य तेल के इम्पोर्ट पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है. पीएम मोदी का मानना है कि अगर हर भारतीय सिर्फ 10 प्रतिशत तेल कम इस्तेमाल करना शुरू कर दे तो देश के अरबों रुपये बच सकते हैं, जिसका इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों में किया जा सकेगा.
ज्यादा तेल का इस्तेमाल भारत में बढ़ती मोटापे की समस्या और नॉन-कम्युनिकेबल डिसीज (NCDs) का मुख्य कारण है. Healthline की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिक तेल, खासकर रिफाइंड पाम ऑयल, नसों में ब्लॉकेज पैदा करता है.
हेल्थ डेटा के अनुसार, रिफाइंड पाम ऑयल का अत्यधिक सेवन खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाता है, जिससे हार्ट अटैक और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि पाम ऑयल की जगह मिलेट्स और कम तेल वाला खाना खाने से सेहत लंबे समय तक अच्छी रहती है.
पीएम मोदी की 10 प्रतिशत कटौती वाली सलाह को मानकर लोग न केवल अपनी कैलोरी इनटेक कम कर सकते हैं, बल्कि मोटापे और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याओं से भी बच सकते हैं.
मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं यदि किसी को पहले से हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट की बीमारी, मोटापा, डायबिटीज, या ब्लड प्रेशर की समस्या है तो पाम ऑयल वाले पैक्ड फूड कम करना बेहतर है. सबसे ज्यादा ध्यान बिस्किट, चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट स्नैक्स और रेडी-टू-ईट चीजों पर देना चाहिए क्योंकि इनमें इसका इस्तेमाल काफी अधिक होता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क