घर छोड़ बाहर रहने वाले बच्चों में चुपचाप बढ़ रही ये दिक्कत, मां-बाप जरूर दें ध्यान

घर से दूर रहकर पढ़ाई या नौकरी करने वाले युवाओं के लिए चौंकाने वाली खबर है. एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि कम उम्र में घर छोड़ना दिल की सेहत पर भारी पड़ सकता है. टीनएजर्स में भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है.

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टीनएजर्स के साथ कम उम्र के बच्चे भी जोखिम में हैं. (Photo: AI Generated) टीनएजर्स के साथ कम उम्र के बच्चे भी जोखिम में हैं. (Photo: AI Generated)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

पढ़ाई या जॉब के कारण आजकल के बच्चों को कई बार काफी कम उम्र में ही अपने घर से दूर रहना पड़ता है. कभी कोई पढ़ाई के लिए दूसरे शहर चला जाता है तो कोई नौकरी के कारण भी अपने माता-पिता से दूर कहीं विदेश में चला जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर से दूर जाना सिर्फ इमोशनल लेवल पर ही नहीं, बल्कि फिजिकल लेवल पर भी आपके लिए काफी खतरनाक हो सकता है. हाल ही में एक स्टडी में फिनलैंड और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया गया है कि कम उम्र में घर से दूर रहने वाले बच्चे और टीनएजर्स में हार्ट अटैक और दिल की बीमारियों का जोखिम काफी अधिक बढ़ जाता है.

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क्या कहती है स्टडी?

फिनलैंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा की गई ये स्टडी यूरोपियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी में पब्लिश हुई है. स्टडी में पाया गया है कि जब कोई युवा या टीनएजर घर छोड़ता है तो उसकी लाइफस्टाइल में अचानक बड़े बदलाव आने लगते हैं. घर का पौष्टिक खाना छूट जाता है और उसकी जगह बाहर का जंक फूड, ऑयली डाइट और डिब्बाबंद चीजें ले लेती हैं. 

वहीं कई लोग शराब पीने और धूम्रपान जैसी आदतें अपना लेते हैं. यह सोशल चेंजेज समय के साथ शरीर में फैट स्टोरेज का कारण बन सकता है और 17 साल वही उम्र होती है जब शरीर में फैट का अधिक लेवल हार्ट हेल्थ के लिए संभावित रूप से हानिकारक हो सकता है.

इसके अलावा अकेले रहने का स्ट्रेस, नींद की कमी और एक्सरसाइज न करना हार्ट की धमनियों पर बुरा असर डालता है. रिसर्चर्स का कहना है कि 18 से 19 साल की उम्र के युवाओं में भी अब दिल की बीमारियों के शुरुआती लक्षण देखे जा रहे हैं, जो भविष्य में गंभीर हार्ट फेलियर का कारण बन सकते हैं.

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दूसरी ओर एक्सपर्ट्स का कहना है कि टीनएज में हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने और बचपन के मोटापे की स्थिति में शरीर की चर्बी कम करने का सबसे अच्छा समय है. यह हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने का सबसे अच्छा समय है, जिससे हेल्दी लाइफ की संभावना बढ़ जाती है.

कैसे हुई ये स्टडी

वैज्ञानिकों ने 9 से 24 वर्ष की आयु के 1803 बच्चों की हेल्थ का एनालेसिस किया. उन्होंने पेट और शरीर में फैट लेवल देखने के बाद मसल्स की मात्रा देखने के लिए ड्यूल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्प्टियोमेट्री (DXA) स्कैन का उपयोग किया. स्कैन 9,11, 15, 17 और 24 साल के उम्र के बच्चों का किया. हार्ट फंक्शन, स्ट्रक्चर के साथ-साथ इंसुलिन, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच के लिए 17 और 24 साल वाले टीनएजर्स के इकोकार्डियोग्राफी स्कैन भी किए गए.

वैज्ञानिकों ने पाया कि 17 साल की उम्र से ही शरीर में अतिरिक्त फैट का संबंध हार्ट स्ट्रक्चर में बदलाव से होता है. इससे सामान्य रूप से ब्लड पंप करने में अत्यधिक दबाव पड़ सकता है जिससे भविष्य में हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है.

तनाव और अकेलापन है बड़ी वजह

घर से दूर रहने पर न केवल खान-पान बिगड़ता है बल्कि बच्चों की मेंटल हेल्थ भी काफी हद तक प्रभावित होती है. फैमिली पास में न होने से युवाओं में स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है और वहीं लंबे समय तक यदि ये स्ट्रेस बना रहता है तो ब्लड प्रेशर भी बिगड़ने लगता है. 

ऐसे में आप तो जानते ही होंगे कि ब्लड प्रेशर का सीधा-सीधा संबंध हार्ट अटैक से होता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, टीनएज की उम्र शरीर की ग्रोथ के लिए काफी नाजुक होती है इसलिए यदि लाइफस्टाइल सही ना हो तो कोलेस्ट्रॉल और बीपी जैसी समस्याएं भी कम उम्र में ही शरीर को घेर लेती हैं.

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क्या है बचने का तरीका?

डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की सलाह है कि अगर आप काम या पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रह रहे हैं तो अपनी डाइट पर खास ध्यान दें. बाहर के खाने के बजाय खुद खाना बनाने की आदत डालें और फल-सब्जियों को प्रायोरिटी दें.

दिन में कम से कम 30 मिनट की वॉक या योगा जरूर करें. सबसे जरूरी है कि स्ट्रेस को खुद पर हावी न होने दें और घर वालों से बातचीत करते रहें. याद रखें करियर और पढ़ाई जरूरी है, लेकिन आपकी सेहत का ध्यान रखना भी आपकी खुदकी जिम्मेदारी है.

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