अब 30 की उम्र से ही कंट्रोल करना होगा कोलेस्ट्रॉल! हार्ट अटैक रोकने के लिए एक्सपर्ट्स ने दी बड़ी सलाह

नई गाइडलाइन के अनुसार, 30 वर्ष की उम्र से पहले LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करना आवश्यक है ताकि हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को घटाया जा सके. विशेषज्ञों ने बच्चों में भी कोलेस्ट्रॉल जांच की सिफारिश की है, जिससे जेनेटिक जोखिम वाले बच्चों की पहचान हो सके.

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कोलेस्ट्रॉल नसों में जमने वाला चिपचिपा पदार्थ है. (Photo: ITG) कोलेस्ट्रॉल नसों में जमने वाला चिपचिपा पदार्थ है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

Cholesterol control guidelines: बदलती लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों ने दिल की बीमारियों को घर-घर तक पहुंचा दिया है. अब तक माना जाता था कि कोलेस्ट्रॉल की चिंता उम्र बढ़ने पर करनी चाहिए लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कम उम्र के लोगों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी समेत 11 बड़े मेडिकल ऑर्गनाइजेशंस ने नई गाइडलाइन जारी की है. इसमें साफ कहा गया है कि अगर आपको दिल की बीमारियों से बचना है तो अब और भी कम उम्र में अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल को और भी नीचे लाना होगा.

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नई गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाए तो आने वाले समय में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामलों को करीब 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.

बचपन से ही शुरू हो जांच

नई गाइडलाइन में बच्चों के कोलेस्ट्रॉल टेस्ट की भी सिफारिश की गई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 10 साल की उम्र के आसपास बच्चों का 'बैड कोलेस्ट्रॉल' यानी LDL चेक किया जाना चाहिए. इससे उन बच्चों की पहचान हो सकेगी जिनमें जेनेटिक कारणों से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा होता है. इसके बाद 18 से 20 साल की उम्र में दोबारा जांच होनी चाहिए और हर 5 साल पर इसे दोहराना जरूरी है.

क्या होनी चाहिए सही लिमिट?

नई गाइडलाइन के मुताबिक, कोलेस्ट्रॉल को लेकर अब मानक काफी सख्त कर दिए गए हैं. सामान्य तौर पर हर व्यक्ति को अपना LDL लेवल 100 से नीचे रखने की कोशिश करनी चाहिए. लेकिन अगर किसी को हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा 10 प्रतिशत से ज्यादा है तो उनके लिए यह लिमिट 70 से कम होनी चाहिए.

वहीं, जो लोग पहले से ही हार्ट अटैक या स्ट्रोक झेल चुके हैं, उन्हें अपना बैड कोलेस्ट्रॉल 55 से भी नीचे रखना होगा.

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लाइफस्टाइल बदलनी भी जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि कोलेस्ट्रॉल कम करने का सबसे पहला और प्रभावी तरीका सही डाइट और एक्सरसाइज ही है. हालांकि, कई मामलों में सिर्फ लाइफस्टाइल से सुधार नहीं होता, वहां दवाओं की जरूरत पड़ती है.

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि कोलेस्ट्रॉल कम करने के नाम पर बिकने वाले सप्लीमेंट्स जैसे मछली का तेल, हल्दी या लहसुन की गोलियों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. क्लीनिकल ट्रायल में ये सप्लीमेंट्स कोलेस्ट्रॉल कम करने में बेअसर साबित हुए हैं.

क्यों जरूरी है ये बदलाव?

हार्ट डिजीज आज दुनिया भर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक है. विशेषज्ञों के अनुसार, हमारा शरीर जितने लंबे समय तक हाई कोलेस्ट्रॉल के संपर्क में रहता है, धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा उतना ही बढ़ जाता है. इसलिए 30 साल की उम्र से ही कोलेस्ट्रॉल पर लगाम कसना भविष्य के बड़े खतरों को टालने का सबसे सुरक्षित तरीका है. 

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य रिसर्च और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है. इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या इलाज का ऑपशंस न समझें.)

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