Antibiotic Resistance: सावधान! अब शरीर पर बेअसर हो रही हैं एंटीबायोटिक दवाएं, रिसर्च में हुआ खुलासा

Antibiotic Resistance: इलाज में सबसे ज्यादा भरोसा की जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जो दवाएं अब तक आम से लेकर कई गंभीर बीमारियों में जान बचाने का काम करती थीं, वे धीरे-धीरे बेअसर होती जा रही हैं. इंसानी शरीर इन दवाओं को पहचानकर उनके खिलाफ रेजिस्टेंस बना रहा है, जिससे साधारण इंफेक्शन भी खतरनाक रूप ले सकता है.

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एंटीबायोटिक दवाओं का  घटा असर! रिसर्च में हुआ खुलासा (Photo- Pixabay) एंटीबायोटिक दवाओं का घटा असर! रिसर्च में हुआ खुलासा (Photo- Pixabay)

शरत कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST

इलाज की सबसे भरोसेमंद दवा मानी जाने वाली एंटीबायोटिक अब खुद बीमार हो रही है. इंसानी शरीर इन दवाओं को पहचानकर बेअसर करने लगा है, जिससे आम संक्रमण भी गंभीर और जानलेवा रूप ले सकता है.  एसएमएस मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध पांच अस्पतालों में किए गए बड़े रिसर्च में खुलासा हुआ है कि एंटीबायोटिक का असर 57 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक कम हो चुका है. लगबग10 हजार मरीजों पर रिसर्च, नतीजे डराने वाले एसएमएस और संबद्ध अस्पतालों की ओर से 9,776 मरीजों पर यह रिसर्च की गई. 

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क्या निकला रिपोर्ट में?
रिपोर्ट के मुताबिक एक भी ऐसा मरीज नहीं मिला, जिसमें एंटीबायोटिक का असर 60 प्रतिशत से अधिक प्रभावी रहा हो. सभी मरीजों में 60 से 98 प्रतिशत तक रेजिस्टेंस पाया गया.  कुछ मामलों में तो दवाएं पूरी तरह फेल हो चुकी हैं. सबसे ज्यादा मामले यूरिन इंफेक्शन, निमोनिया और स्किन इंफेक्शन से जुड़े सामने आए हैं. कई मरीजों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया अब सामान्य रूटीन इंफेक्शन में भी फैल चुका है. 

एंटीबायोटिक पर कितना घटा असर?
रिसर्च में अलग-अलग एंटीबायोटिक पर रेजिस्टेंस का प्रतिशत इस प्रकार सामने आया है—
वेकोनमाइसिन (MIC) – 100%लीनेजोलिड – 98%टाइगेसिसिलिन – 97%टेसोप्लेनिन – 97%डॉक्सीसिलिन – 93%एम्पिसिलिन – 93%सिप्रोफ्लोक्सिन – 87%सेफटाजिडिम – 79%जेंटामाइसिन – 79%एरिथ्रोमाइसिन – 77%सिप्रोफ्लोक्सिन – 77%टेट्रासिलिन – 76%इमिपेनम – 73%एरिथ्रोमाइसिन – 70%लमिपेनम – 65%एमपिसिलिन – 65%एमिकासिन – 62–63%सेफोक्सिटिन – 63%माइनोसाइक्लाइन – 57%क्लिनडेमाइसिन – 56%मेरोपेनम – 55%सेफोटेक्साइम – 60%

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रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्दी, जुकाम और वायरल संक्रमण में लोग मनमर्जी दवा की दुकान से खरीदकर एंटीबायोटिक खा रहे हैं. इसका नतीजा यह है कि गंभीर स्थिति में पहुंचने पर वही दवाएं असर नहीं कर पा रही हैं.  एसएमएस माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ रजनी शर्मा के अनुसार, बच्चों को वायरल और एलर्जी में दी जाने वाली एंटीबायोटिक से शरीर में जल्दी रेजिस्टेंस बन जाता है.  कोविड के बाद इन दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल इस संकट को और गहरा कर रहा है.  डब्ल्यूएचओ की ओर से ‘लैंसेट जर्नल’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 12.9 लाख मौतें एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की वजह से हो चुकी हैं.  विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो भविष्य में सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल हो जाएगा. 

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें. निर्धारित डोज और तय अवधि का पालन करें.  सर्दी-जुकाम और वायरल इंफेक्शन में इसका उपयोग बिल्कुल न करें. एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि करीब 10 हजार मरीजों पर की गई इस रिसर्च की रिपोर्ट दिल्ली भेज दी गई है. आने वाले समय में एंटीबायोटिक के सही उपयोग को लेकर अवेयरनेस बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. 

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