यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच सपा नेता आजम खान के नाम पर एक बेहद विवादास्पद बयान वायरल हो रहा है. इसमें कहा गया है कि हिंदू नेता चाहे जितनी बार मुस्लिम टोपी पहन लें लेकिन मुस्लिम नेता तिलक नहीं लगाएंगे. हिंदू चाहे नमाज को कितनी भी इज्जत दें लेकिन मुस्लिम वंदे मातरम का बहिष्कार जरूर करेंगे. क्योंकि इस्लाम में धर्मनिरपेक्षता और देशभक्ति दोनों ही हराम हैं. इस बयान के साथ आजम खान का नाम लिखा है और उनकी तस्वीर भी लगी है.
विभिन्न आरोपों में जेल में बंद आजम खान को कोरोना से जुड़ी परेशानियों के चलते हाल ही में लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. फिलहाल वे अस्पताल में हैं.
फेसबुक पर ये बयान उनके नाम पर काफी वायरल है.
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा ये आपत्तिजनक बयान आजम खान ने नहीं दिया है. ये बयान साल 2013 में भी आजम के नाम पर वायरल हुआ था. उस वक्त उन्होंने पुलिस से इसकी शिकायत की थी.
क्या है सच्चाई
हमें साल 2013 की कई फेसबुक पोस्ट मिलीं जिनमें वायरल बयान को आजम खान के नाम से शेयर किया गया था. उस वक्त मीडिया में भी इसे लेकर काफी चर्चा हुई थी.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की 21 जून 2013 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये बयान वायरल होने के बाद आजम खान ने डीजीपी को एक शिकायती पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि 'मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है. यह मेरी छवि खराब करने का प्रयास है'. उस वक्त वो उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे.
इसके अलावा, अगर आजम खान ने हाल फिलहाल में ऐसा आपत्तिजनक बयान दिया होता तो इसे लेकर हर प्रमुख मीडिया वेबसाइट में खबर छपी होती. लेकिन, हमें ऐसा कुछ नहीं मिला. पड़ताल से ये साबित हो जाता है कि आजम खान के नाम से 2013 से ही एक मनगढ़ंत बयान वायरल हो रहा है.
ज्योति द्विवेदी