दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को दो महीने से ज्यादा हो चुके हैं. दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के कई हिस्सों में किसान कृषि कानूनों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक तस्वीर जमकर वायरल हो रही है. तस्वीर में देखा जा सकता है कि बैलगाड़ियों की एक रैली निकल रही है. इन बैलगाड़ियों पर झंडे और बैनर भी लगे हुए हैं. तस्वीर को मौजूदा किसान आंदोलन से जोड़कर दावा किया जा रहा है कि किसानों का इंकलाब देश के सबसे पिछड़े गांवों तक पहुंच गया है.
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल पोस्ट पूरी तरह से सच नहीं है. किसानों का विरोध कई गांवों में जरूर चल रहा है, लेकिन ये तस्वीर सितंबर 2018 की है जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में बैलगाड़ी रैली निकाली थी.
इस तस्वीर को शेयर करते हुए लोग कैप्शन में लिख रहे हैं, " ये थप्पड़ है गोदी मीडिया के मुंह पर... देश के सबसे पिछड़े गांवों तक भी किसानों का इन्कलाब पहुंच गया है. #किसान_एकता_जिंदाबाद."
इसी कैप्शन के साथ ये फोटो फेसबुक और ट्विटर पर खूब शेयर की जा रही है. वायरल पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.
तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमें न्यूज वेबसाइट 'पत्रिका' की एक खबर मिली. 13 सितंबर 2018 को प्रकाशित हुई इस खबर में वायरल तस्वीर मौजूद थी. खबर के मुताबिक, मध्य प्रदेश के बालाघाट में यूथ कांग्रेस ने पेट्रोल व डीजल के मूल्यों में हो रही वृद्धि को लेकर ये बैलगाड़ी रैली निकाली थी. इस रैली के बारे में उस समय 'नईदुनिया' की वेबसाइट पर भी खबर प्रकाशित हुई थी.
इस बैलगाड़ी रैली को लेकर 13 सितंबर, 2018 को मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस ने भी फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की थी. वायरल तस्वीर में भी बैलगाड़ी पर "जिला युवा कांग्रेस बालाघाट" और पेट्रोल के दाम संबंधी बोर्ड लगे देखे जा सकते हैं.
यहां ये बात पुख्ता हो जाती है कि तस्वीर दो साल से ज्यादा पुरानी है और इसका किसान आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि, ये बात सही कि कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान भी बैलगाड़ी रैली निकाल चुके हैं. इसको लेकर इंटरनेट पर कुछ खबरें भी मौजूद हैं.
अर्जुन डियोडिया