बाढ़ से देश के कई हिस्सों में हाहाकार मचा हुआ है जिसकी कई तस्वीरें और वीडियोज इंटरनेट पर रोजाना देखने को मिल रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसे हिंदुओं के धार्मिक स्थल वैष्णो देवी का बताया जा रहा है. वीडियो दो अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर बनाया गया है. पहले हिस्से में एक गली में बहुत तेज रफ्तार से पानी बहता हुआ देखा जा सकता है जिसमें एक आदमी भी बहता चला जा रहा है. गली के दोनों ओर कुछ दुकानें और लोग भी हैं जो आदमी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. वीडियो के दूसरे हिस्से में भी किसी चौड़ी सड़क पर से तेज पानी बहता हुआ नजर आ रहा है और कुछ लोग यहां से धीरे-धीरे निकल रहे हैं. पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.
एक यूजर ने वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है, "माँ वैष्णो देवी जम्मू में बारिश का कहर जय माता रानी सबकी रक्षा करो". इसी तरह कई अलग-अलग कैप्शन के साथ ये वीडियो फेसबुक और ट्विटर पर वायरल हो रहा है और इसे माता वैष्णो देवी का बताया जा रहा है.
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल पोस्ट पूरी तरह सच नहीं है. वीडियो का पहला हिस्सा राजस्थान के अजमेर का और साल 2019 का है. वीडियो का दूसरा हिस्सा वैष्णो देवी का ही है लेकिन दो साल से ज्यादा पुराना है. हालांकि, ये सच है कि पिछले कुछ दिनों में जम्मू और वैष्णों देवी वाले इलाके में भारी बारिश हुई है.
कैसे पता चली सच्चाई?
वीडियो का पहला हिस्सा
कुछ कीवर्ड्स की मदद से खोजने पर हमें वायरल वीडियो के इस भाग को लेकर कई न्यूज रिपोर्ट्स मिली. ये वीडियो 1 अगस्त 2019 का है जब भीषण बारिश के चलते अजमेर शरीफ दरगाह के पास का इलाका जलमग्न हो गया था और एक आदमी संतुलन बिगड़ने की वजह से इसमें बह गया था. आदमी अपने ठेले को बचाने की कोशिश कर रहा था लेकिन तेज बहाव में खुद बहता चला गया. हालांकि, बाद में इस आदमी को बचा लिया गया था.
वीडियो का दूसरा हिस्सा
पड़ताल में सामने आया कि इस हिस्से को फेसबुक पर कई लोगों ने अगस्त 2019 में वैष्णो देवी का बताकर शेयर किया था. इसी जगह का एक अन्य वीडियो भी इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें रास्ते पर से पानी बहता हुआ दिख रहा है. इस वीडियो को भी वैष्णो देवी का बताया जा रहा है. ये वीडियो हाल-फिलहाल में ही शेयर होना शुरू हुआ है जब जम्मू सहित कटरा में भारी बारिश हुई. इस वीडियो के कुछ स्क्रीनशॉट को वैष्णो देवी में बारिश के कहर से जुड़ी "पंजाब केसरी" की एक खबर में भी इस्तेमाल किया गया है. इसका मतलब ये कि ये वीडियो वैष्णो देवी का ही है.
अब अगर इस वीडियो और वायरल वीडियो के दूसरे हिस्से को मिलाएं तो साफ हो जाता है कि दोनों एक ही जगह या इलाके के हैं. यानी कि वायरल वीडियो का दूसरा भाग वैष्णो देवी का ही है लेकिन दो साल से ज्यादा पुराना है. इस तरह हमारी तफ्तीश में इस बात कि पुष्टि हो जाती है कि वायरल वीडियो के साथ गलत जानकारी दी जा रही है. वीडियो का शुरुआती हिस्सा दो साल पुराना और अजमेर का है, जबकि बाद का दृश्य वैष्णो देवी का है लेकिन पुराना है.
अर्जुन डियोडिया