हाल ही में पूरी हुई में सरकार को डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी हुई, लेकिन क्या ये कमाई कम है और असल में सरकार को इससे ज्यादा रकम मिलनी चाहिए थी?
सोशल मीडिया पर एक अंग्रेजी अखबार की खबर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए बहुत से लोग यही दावा कर रहे हैं. इस स्क्रीनशॉट के मुताबिक 5G ऑक्शन में देश को 2.8 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्डतोड़ घाटा हुआ है.
इसे शेयर करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा, ‘ देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला.’ फेसबुक पर भी ये हो रहा है.
‘इंडिया टुडे’ की फैक्ट चेक टीम ने पाया 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में देश को 2.8 लाख करोड़ रुपए के नुकसान होने की बात करने वाला स्क्रीनशॉट फर्जी है. असली खबर की हेडिंग में इस नीलामी से सरकार को 1.5 लाख करोड़ रुपए की आमदनी होने की बात कही गई है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
सबसे पहले तो हमें इस कथित खबर में दो जगह लिखी गई घाटे की रकम में अंतर दिखाई दिया. हेडिंग में लिखी रकम में 28 के बाद 14 शून्य लगे हैं यानी ये रकम हुई 28 हजार लाख करोड़ रुपए. जबकि सब-हेडिंग में घाटे की रकम 2.8 लाख करोड़ रुपए बताई गई. किसी भी न्यूज पेपर में अमूमन ऐसी गलती नहीं होती.
वायरल हो रही अखबार की कटिंग में ‘टाइम्स बिजनेस’ लिखा है. लिहाजा सबसे पहले हमने वेबसाइट पर इस खबर को खोजा. यहां हमें 5G ऑक्शन में 2.8 लाख करोड़ के घाटे वाली हेडलाइन के साथ कोई खबर नहीं मिली.
इस स्क्रीनशॉट में हेडिंग के नीचे खबर लिखने वाले रिपोर्टर का नाम लिखा है. हमने पंकज डोवाल नाम के रिपोर्टर के वेरीफाइड ट्विटर प्रोफाइल चेक किया. ऐसा करने पर हमें इनका मिला. इस ट्वीट में दो अगस्त के ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के बिजनेस पेज की तस्वीर थी.
इस पेज में एक अगस्त को हुई 5G ऑक्शन के नतीजे से जुड़ी खबरें भी थीं. इस पेज की हेडिंग में 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ की आमदनी होने की बात थी.
इस हेडिंग के अलावा इस पेज की बाकी खबरें और वायरल स्क्रीनशॉट की खबरें एक जैसी ही थीं. यानी वायरल स्क्रीनशॉट में इसी पेज की असली हेडिंग हटाकर उसे एडिट करके उसमें घाटे की बात जोड़ दी गई है.
साफ है, 5G ऑक्शन से जुड़ी खबर को एडिटिंग के जरिए लाखों करोड़ रुपए के घाटे की हेडिंग के साथ इसे शेयर किया जा रहा है
सुमित कुमार दुबे